Deoli News 2 सितंबर (दैनिक ब्यूरो नेटवर्क) पर्युषण पर्व के छठे दिन मंगलवार को देवली की पार्श्वनाथ धर्मशाला में उत्तम संयम धर्म की पूजा की गई। इस अवसर पर मुनि प्रणीत सागर ने बताया कि संयम केवल इंद्रियों को वश में करना नहीं, बल्कि आत्मा की सबसे बड़ी विजय है।
सच्चे संयमी वही हैं, जिनका मन, वचन और कर्म वासना और आसक्ति से मुक्त होता है। इस दौरान सुगंध दशमी का पर्व धूमधाम से मनाया गया। मुनि ने पौराणिक कथा के माध्यम से इस व्रत का महत्व समझाया, जिसके अनुसार यह व्रत दुर्गंध से मुक्ति दिलाकर शरीर को सुगंधित बनाता है। शहर के सभी मंदिरों में श्रद्धालुओं ने धूप क्षेपण कर कर्मों की निर्जरा की कामना की। वहीं णमोकार महामंत्र विधान’ का आयोजन भी हुआ। जिसमें मोहनलाल और महावीर (टोंक) परिवार को सौधर्म इंद्र बनने का सौभाग्य मिला।
पटेल नगर मंदिर में भी हुई पूजा
सुगंध दशमी पर जैन मंदिरों में भीड़ रही है। लोग अपने कर्मों के क्षय के लिए भगवान के समक्ष धूप कर रहे हैं। पटेल नगर जैन समाज के कोषाध्यक्ष अंजनी कुमार जैन ने बताया कि सभी पांचो मंदिरों में श्री महावीर दिगंबर जैन मंदिर, श्री आदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर, श्री चंद्रप्रभु दिगंबर जैन मंदिर, श्री शांतिनाथ मंदिर, श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर पटेल नगर सहित जैन कॉलोनी के मंदिरों में भी यह आयोजन हो रहा है। सभी मंदिरों में सजीव झांकियां सजाई गई है।



