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HomeBusinessऑनलाइन शॉपिंग से व्यापार प्रभावित, दीवाली पर भी मायूसी

ऑनलाइन शॉपिंग से व्यापार प्रभावित, दीवाली पर भी मायूसी

स्थानीय व्यापार के लिए चुनौती


@आशीष बागड़ी

Deoli News 13 अक्टूबर (दैनिक ब्यूरो नेटवर्क) त्यौहारों के मौसम में जहां स्थानीय बाजारों में रौनक होनी चाहिए थी, वहीं देवली शहर का खुदरा व्यापार इस समय ऑनलाइन शॉपिंग की तेज लहर के सामने संघर्ष कर रहा है। हालत यह है कि हर चीज अब ऑनलाइन आने लगी है।

जूते-चप्पल, कपड़े, आर्टिफिशियल ज्वेलरी, मोबाइल, साड़ी, ड्रेस, कॉस्मेटिक, बच्चों के कपड़े और इलेक्ट्रॉनिक, होम अप्लायंस से लेकर परचून (किराना) जैसी रोजमर्रा की चीजें तक अब लोग ऑनलाइन खरीद रहे हैं, जिसका सीधा और गंभीर असर शहर के छोटे और मझोले दुकानदारों पर पड़ रहा है। स्थानीय व्यापारियों के अनुसार, ऑनलाइन खरीददारी की बढ़ती प्रवृत्ति ने देवली के व्यापार को करीब 50 प्रतिशत तक प्रभावित किया है।

दीवाली का समय होने के बावजूद दिनभर शहर में डिलीवरी बॉय की लगातार होती रनिंग यह बताने के लिए काफी है कि लोग स्थानीय दुकानों की बजाय किस हद तक ई-कॉमर्स कंपनियों पर निर्भर हो चुके हैं।

स्थानीय खरीद क्यों है बेहतर?

व्यापारी वर्ग का कहना है कि स्थानीय दुकानदार से माल खरीदना हमेशा बेहतर होता है। किसी भी तरह की खराबी, शिकायत या सेवा की स्थिति में ग्राहक सीधे दुकानदार को ‘उलाहना’ दे सकता है, और यह स्थानीय दुकानदार ही होता है, जो उधारी (क्रेडिट) की सुविधा भी देता है। इसके विपरीत, ऑनलाइन कंपनियां आमतौर पर इस तरह की व्यक्तिगत सेवा और सहूलियत नहीं देती हैं। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से खरीदे गए सामान में शिकायत होने व रिटर्न करने पर ग्राहक को लंबी और जटिल प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है।

कोविड काल में स्थानीय दुकानदारों का योगदान रहा

व्यापारियों ने बीते मुश्किल समय की याद दिलाते हुए कहा कि कोविड महामारी के दौरान जब देशव्यापी लॉकडाउन था, तब स्थानीय दुकानदारों ने ही जोखिम उठाकर आमजन को आवश्यक वस्तुएँ उपलब्ध करवाई थीं। यदि उस कठिन दौर में लोकल दुकानदार सहयोग नहीं करते, तो आमजन का जीना दुश्वार हो जाता। लेकिन अफसोस! लोग उस सहयोग को भूलकर अब परचून जैसे सामान को भी ऑनलाइन परचेस कर रहे हैं। उसे वक्त ऑनलाइन कंपनियों कहां थी।

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दवाइयां भी लोग ऑनलाइन ही मंगाने लगे हैं। श्री व्यापार महासंघ के अध्यक्ष सुरेश अग्रवाल का कहना है कि ऑनलाइन ने सभी तरह के धंधे चौपट कर दिए। वही मंडी के देवली से बाहर जाने के चलते और डूब क्षेत्र की पंचायत के कटने से यहां के व्यापार का ढर्रा बैठ गया है।

व्यापार पर दोहरी मार

इस वर्ष देवली शहर के व्यापार पर ऑनलाइन परचेजिंग के साथ-साथ दोहरी मार पड़ी है। एक तो लंबे अरसे तक चली मानसूनी बारिश ने व्यापार की गति को धीमा कर दिया, दूसरी ओर बढ़ती महंगाई ने ग्राहकों की क्रय शक्ति को और कम कर दिया है। इसके अलावा, कई वर्ष पूर्व मंडी को शहर से बाहर स्थानांतरित किए जाने से भी शहर के आंतरिक व्यापार पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है। व्यापार महासंघ देवली अध्यक्ष पंकज जैन सर्राफ़ का कहना है कि ऑनलाइन व्यापार ने धंधे चौपट कर दिए तो देवली से बाहर गई मंडी ने स्थानीय व्यापार के तोते उड़ा दिए। व्यापारी दीपावली जैसे त्योहार पर खाली बैठे हैं, इससे ज्यादा धंधा क्या खराब होगा। देवली की पुरानी मंडी को गौण मंडी बनाना चाहिए, तब जाकर ही कुछ शहर के व्यापार का भला होगा। उल्लेखनीय है कि सोने चांदी के भाव ने सराफा बाजार को प्रभावित किया है।

स्थानीय स्तर पर उपलब्ध न हो वह चीज मंगाए

जानकारों का कहना है कि ऑनलाइन परचेजिंग उन सामानों तक सीमित होनी चाहिए जो स्थानीय स्तर पर उपलब्ध न हों या जिनकी कीमत में बहुत बड़ा अंतर हो। शहर के नागरिकों को चाहिए कि वे ‘रूबरू परचेसिंग’ को प्राथमिकता दें और स्थानीय दुकानदारों को सहयोग करें। व्यापारी वर्ग का संदेश है कि मुश्किल वक्त में यही स्थानीय दुकानदार काम आएंगे, ऑनलाइन कंपनियाँ नहीं। लिहाजा, शहर के आर्थिक चक्र को बनाए रखने के लिए स्थानीय व्यापार को समर्थन देना समय की मांग है।

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