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HomeDainik Bureau Deskक्रियाकांड के भ्रम से निकलकर आत्म-तत्व को पहचानें: मुनि प्रणीत सागर

क्रियाकांड के भ्रम से निकलकर आत्म-तत्व को पहचानें: मुनि प्रणीत सागर

पंचकल्याणक महोत्सव का दूसरा दिन


Deoli News 7 फरवरी (दैनिक ब्यूरो नेटवर्क) पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव के दूसरे दिन शनिवार को मुनि प्रणीत सागर महाराज ने श्रावकों को धर्म के वास्तविक मर्म से परिचित कराया। उन्होंने अपने प्रवचन में गंभीर आध्यात्मिक चिंतन साझा करते हुए कहा कि सिद्धत्व की प्राप्ति तक हर जीव आध्यात्मिक रूप से ‘गर्भवती’ है।

क्योंकि वह निरंतर नए कर्मों को जन्म दे रहा है। मुनि ने वर्तमान पूजन पद्धति में भावों की शून्यता पर चिंता व्यक्त करते हुए इसे मात्र ‘जल स्थानांतरण’ की संज्ञा दी। उन्होंने माताओं को मरुदेवी जैसा पावन चिंतन अपनाने की प्रेरणा दी, ताकि समाज को संस्कारित संतानें प्राप्त हो सकें। महाराज ने स्पष्ट किया कि जब तक खान-पान में शुद्धि और इंद्रियों पर संयम नहीं होगा, तब तक वीतरागता का मार्ग प्रशस्त नहीं हो सकता। प्रवचन का मुख्य संदेश बाहरी प्रदर्शन को छोड़कर तत्व निर्णय और भेद-विज्ञान द्वारा आत्म-कल्याण करना रहा।

समाज के रमेश गोयल (बाजटा), ललित छाबड़िया, मुकेश सावर, अशोक जैन (रोपा) नेमीचंद (बाजटा) शुभम चौसला ने बताया कि महोत्सव के तहत शनिवार को गर्भ कल्याणक (उत्तरार्द्ध) की क्रियाएं संपन्न हुईं, जिसमें अभिषेक, शांतिधारा, पूजन, हवन के साथ ही दोपहर में सीमांतनी क्रिया और वेदी शुद्धि के अनुष्ठान किए गए। रात्रि में महाराजा नाभिराय का दरबार, स्वप्न फल और 56 कुमारियों के आगमन सहित सांस्कृतिक प्रस्तुतियां आकर्षण का केंद्र रहीं।

जन्म कल्याण पर यह होंगे कार्यक्रम

महोत्सव में 8 फरवरी को ‘जन्म कल्याणक’ का उल्लास बिखरेगा। इस अवसर पर भव्य जन्माभिषेक जुलूस निकाला जाएगा, जिसमें अयोध्या नगरी की सड़कों पर भक्ति का अनूठा संगम देखने को मिलेगा।ल भव्य शोभायात्रा में धर्म चक्र, शहनाई वादक, ऊंट गाड़ियाँ, और घोड़ों के साथ विभिन्न मनमोहक झांकियां शामिल होंगी। जुलूस की भव्यता को बढ़ाने के लिए नेशनल बैंड, पंजाब बैंड, आरके बैंड, मॉ देवरी बैंड और मस्का बैंड अपनी प्रस्तुतियां देंगे।

शाही बग्गियों और 31 हाथियों के लवाजमे के साथ मुनि के सान्निध्य में यह जुलूस नगर के प्रमुख मार्गों जहाजपुर चुंगीनाका, गुरुद्वारा रोड, पुलिस स्टेशन और माता सर्कल से होता हुआ पांडुकशिला तक पहुंचेगा, जहां प्रभु का जन्माभिषेक संपन्न होगा।

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