Deoli News 30 अगस्त (दैनिक ब्यूरो नेटवर्क) शहर के विवेकानंद कॉलोनी स्थित पार्श्वनाथ धर्मशाला में मुनि प्रणीत सागर महाराज एवं क्षुल्लक विधेय सागर महाराज के सान्निध्य में चल रहे पर्युषण पर्व में तीसरे दिन उत्तम आर्जव धर्म की पूजा की गई।
सुबह 6.30 बजे सर्वप्रथम श्रीजी की शांतिधारा एवं अभिषेक किया गया। इसके बाद श्रुतशाला के विद्यार्थियों द्वारा तत्त्वार्थ-सूत्र के 10 अध्याय का वाचन किया गया। वाचन के बाद मुनि ने तृतीय अध्याय का अर्थ बताते हुए बताते हुए सात नरक की विवेचना की और उनमें उत्पन्न होने वाले नारकीय जीवों के ज्ञान एवं गुणस्थान के बारे में समझाया। साथ ही उत्तम आर्जव धर्म पर बताया कि छल, कपट, व दिखावे को त्यागकर सीधी और सरल वाणी बोलना ही सच्चा आर्जव धर्म है। जिस मन में निष्कपट का भाव होता है।
वहां न तो झूठ बस सकता है और ना ही कपट टिक सकता है। मीडिया प्रभारी विकास जैन टोरडी ने बताया की प्रथम सत्र में भगवान की प्रथम शांतिधारा छीतर जैन परिवार एवं द्वितीय शांतिधारा का सौभाग्य राजेन्द्र जैन परिवार को प्राप्त हुआ।



