Desk News 28 नवम्बर (दैनिक ब्यूरो नेटवर्क) जिले में रबी की फसल सरसो में प्रथम सिंचाई हो रही है। जिसमें यूरिया का उपयोग किया जा रहा है। रबी के लिए मार्च 2026 तक करीब 50 हजार मैट्रिक टन यूरिया की आवश्यकता होगी।
वहीं अभी तक 29 हजार 500 मै. टन यूरिया प्राप्त हो गया है तथा करीब 10 हजार कटटे से अधिक यूरिया रोजाना प्राप्त एवं वितरण हो रहा है। साथ ही खरीफ मे लगातार वर्षा के कारण यूरिया का कम उपयोग हुआ था तथा बचा हुआ यूरिया भी रबी मे उपयोग हुआ है। कृषि विभाग के संयुक्त निदेशक वीरेन्द्र सिंह सौंलकी ने बताया कि पूर्व मे वर्षा होने पर सरसो की फसल छोटी अवस्था मे होने पर भी कृषको द्वारा यूरिया दिया गया एवं अब सिंचाई के साथ दोबारा यूरिया देने से यूरिया की कमी आई है।
कृषि विज्ञान केन्द्र के विशेषज्ञ डॉ. बंशीधर ने बताया कि अधिक मात्रा मे नत्रजन के उपयोग से फसल की बढ़वार ज्यादा हो जाने के कारण उत्पादन मे कमी आती है। इसलिए सिफारिश से अधिक यूरिया उपयोग नही करे। गत वर्ष एक अक्टूबर से 27 नवम्बर तक 27 हजार 300 मै. टन यूरिया प्राप्त हुआ था। जबकि इस वर्ष समान अवधि मे 29 हजार 500 मै. टन यूरिया प्राप्त हो चुका है तथा आपूर्ति और बढाई जा रही है। विक्रेताओ द्वारा यूरिया की कालाबाजारी नही की जा सके। इसके लिए कृषि विभाग के कार्मिको एवं पुलिस की मौजूदगी मे यूरिया वितरण कराया जा रहा है।
आदेश नही मानने या अनियमितता का प्रयास करने वाले 10 उर्वरक विक्रेताओ के लाईसेंस निलम्बित किए गए है।


