Deoli News 1 जनवरी (दैनिक ब्यूरो नेटवर्क) शहर के बावड़ी बालाजी मंदिर परिसर में चल रही संगीतमय श्रीराम कथा में बुधवार को पं पुष्प मुरारी बापू ने सीताजी की विदाई का प्रसंग सुनाया।
उन्होंने कहा कि सीताजी व रामजी जनकपुर से अयोध्या आते हैं। सब मेहमान चले जाते हैं। विश्वामित्रजी जब जाने लगते हैं, तब राजा दशरथ उनसे निवेदन करते हैं कि हमेशा हमारे परिवार के ऊपर संतों की कृपा बनी रहे। एक राजा भी संतों की कृपा चाहता है। वे संत आदर और सम्मान के प्रतीक्षारत रहते हैं। संतों को किसी के धन की आवश्यकता नहीं रहती है। पुष्प मुरारी बापू ने कहा कि जब हमारे जीवन में हद से ज्यादा खुशियां आती हैं। तब दुख की भी प्राप्ति होती है और वही प्रसंग भगवान राम वनवास के लिए प्रयुक्त हुआ। कैकई ने रामजी के लिए 14 वर्ष का वनवास मांगा। लेकिन रामजी को किंचित मात्र भी दुख नहीं हुआ। राजा दशरथ तो यह बात सुनकर के बेहोश हो गए। लेकिन रामजी के हृदय में दुख नहीं हुआ।
रामजी का अवतार रावण को मारने, शबरी व सुतीक्ष्ण को दर्शन देने के लिए हुआ था। इस कार्य को रामजी अयोध्या में रहकर के पूरा नहीं कर सकते थे। अगर हमें किसी लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए कितना ही दुख भोगना पड़े। अपना राज्य पथ तक छोड़ने पड़े तो, वह भी हमें छोड़ देना चाहिए। यदि हम अपने धन दौलत से परिवार से चिपके रहेंगे। तब हम अपने लक्ष्य को प्राप्त नहीं कर सकते। आज रामजी ने अयोध्या से अपनी मां कौशल्या से आज्ञा लेकर के लक्ष्मण अपनी मां सुमित्रा से आज्ञा लेकर के वनवास की यात्रा पर प्रस्थान किया। तमसा के तीर पर प्रथम दिन रात्रि में प्रभु ने विश्राम किया।



