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नम आँखों से विदाई : चातुर्मास के बाद मुनि प्रणीत सागर का विहार हुआ

जैन समाज हुआ भावुक


Deoli News 26 अक्टूबर (दैनिक ब्यूरो नेटवर्क) चातुर्मास के तहत धर्म, अध्यात्म और आत्म-कल्याण की शिक्षा से देवली के जैन समाज को नई दिशा देने वाले जैन मुनि प्रणीत सागर महाराज और क्षुल्लक विधेय सागर का शनिवार को मंगल विहार हुआ।

समाज के सुनील जैन (नासिरदा) ने बताया कि गुरुदेव के विहार से पूरा समाज भावुक हो उठा और विदाई का समूचा माहौल गमगीन हो गया। फिलहाल महाराज का मंगल विहार देवली से घटियाली के लिए हुआ। विहार से पूर्व, पार्श्वनाथ धर्मशाला परिसर में समाज के सैकड़ों लोग एकत्र हुए। इस अवसर पर सामूहिक विनयांजलि हुई। जिसने माहौल को अत्यंत भावुक बना दिया। श्रद्धालुओं की आँखें नम थीं और उनकी आँखों से आंसू बहने लगे। इन चार महीनों में प्रतिदिन होने वाले प्रवचनों ने समाज को एक नई दिशा दी थी।

वहीं श्रुतशाला के माध्यम से महिलाओं और बच्चों को भी धर्म का गहन ज्ञान प्राप्त हुआ था। सैकड़ों लोगों ने नम आँखों से गुरु को विनयांजलि दी। इस दौरान जय गुरुदेव के नारे लगे। इसके बाद महाराज ने सभी मंगल कलश प्राप्त करने वालों के घर जाकर मंगल कलश की स्थापना की। शाम 4 बजे महाराज का ऊंचा के लिए विहार हुआ। समाज के सैकड़ों लोग बैंड-बाजे के साथ जैन मुनि को नगर के बाहर तक विदाई देने के लिए साथ गए। महाराज रात्रि विश्राम ऊंचा स्कूल में करके, रविवार सुबह घटियाली के लिए विहार कर गए। इस विहार ने जैन श्रद्धालुओं को गहरे स्नेह और धर्मोपदेश के अद्भुत क्षणों की यादों के साथ छोड़ दिया है।

जिससे समूचा माहौल अत्यंत भावुक और गमगीन हो गया। इस मौके पर चतुर्मास कमेटी अध्यक्ष बाबूलाल जैन (नासिरदा) समेत उपस्थित थे। इससे पहले 24 अक्टूबर को जैन मुनि की पिच्छिका परिवर्तन कार्यक्रम हुआ। इसे लेकर शहर में शोभायात्रा निकाली गई और अटल उद्यान के टीनशेड परिसर में यह कार्यक्रम हुआ। बताया गया कि आगामी फरवरी माह में देवली के चंद्रप्रभु जिनालय की नवीन वैदिक में पंच कल्याण महोत्सव होगा। इसे लेकर जैन मुनि पुनः देवली में पुनः प्रवास करेंगे।

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