Friday, April 24, 2026
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HomeDB Exclusiveप्रदेश का पहला पारद शिवलिंग है संकटहरण हनुमत धाम में

प्रदेश का पहला पारद शिवलिंग है संकटहरण हनुमत धाम में

(सावन विशेष) : 251 किलो पारे से निर्मित चमत्कारिक पारद शिवलिंग

@आजाद नेब

Jahazpur News 12 अगस्त (दैनिक ब्यूरो नेटवर्क) जहाजपुर क्षेत्र के शक्करगढ़ कस्बे के संकट हरण हनुमत धाम मंदिर में पारा से बना शिवलिंग राजस्थान का एकमात्र शिवलिंग है, जो अनूठा शिवलिंग है। वहीं इसका वजन 251 किलोग्राम है।

यह पूरी तरह पारे से बना है, जो पूरे राजस्थान में कहीं नहीं है। मान्यता है कि पारे के शिवलिंग पर एक बार अभिषेक करो तो 100 बार के समान पुण्य मिलता है। इसके दर्शन भर से अपने मन की शांति और सुख पा सकते हैं।

उज्जैन से लाए शिवलिंग

पारे से निर्मित इस शिवलिंग को शक्करगढ़ कस्बे के अमर निरंजनी आश्रम के स्वामी जगदीशपुरी महाराज के आग्रह पर उज्जैन में सिद्ध संत स्वामी नारदा नंद ने शास्त्रीय विधि से शिवलिंग का निर्माण किया। जिसे 18 फरवरी 2023 को उज्जैन से शक्करगढ़ हनुमत धाम लाया गया और 22 फरवरी को यहां बड़े ही धूमधाम के साथ प्राण प्रतिष्ठा की गई। सावन में पारे से निर्मित शिवलिंग के दर्शन करने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़नें लगी है।

पारद शिवलिंग में ब्रह्मा, विष्णु महेश तीनों मौजूद

स्वामी जगदीशपुरी महाराज ने बताया कि शिव पुराण एवं अन्य शास्त्रों के अनुसार पारदेश्वर शिवलिंग पूजन एवं दर्शन का विशेष महत्व माना गया है। पारा एकमात्र ऐसी धातु है, जो तरल पदार्थ के रूप में होती है। इस तरल पदार्थ को चांदी एवं औषधीय पदार्थ मिलाकर ठोस रूप में तैयार किया जाता है। पारे से शिवलिंग बनाने का अधिकार केवल सन्यासी संतो को ही होता है। पारा भगवान शिव का अत्यंत प्यारा प्रिय पदार्थ है। पारे से निर्मित शिवलिंग की पूजा व स्पर्श करने से पूजा करने व दर्शन करने वालों पर तंत्र मंत्र का विपरीत प्रभाव नहीं पड़ता है। पारदेश्वर महादेव दर्शन पूजन से ही विद्या एवं लक्ष्मी की अभिवृत्ति होती है। शारीरिक एवं मानसिक रूप से अस्वस्थ तथा तनाव ग्रत व्यक्ति को पारदेश्वर पूजन अवश्य करना चाहिए। हनुमत धाम में हनुमान राम दरबार विग्रह, राधा कृष्ण एवं पारदेश्वर महादेव के एक साथ दर्शन करने का अवसर मिलता है है।

मंदिर की यह है विशेषताएं

संकटहरण हनुमत धाम भव्य होने के साथ ही अनूठा मंदिर हैं। यहां परिसर में भव्य रंग-बिरंगे फूलों से आकर्षक उद्यान यज्ञशाला भगवान विष्णु के क्षीरसागर एवं कैलाश पर्वत पर शंकर भगवान की जटा से गंगा मैया “भव्य साधना समाधि स्थल खास है। ढाई हजार श्रद्धालुओं के बैठने के लिए सत्संग भवन, अतिथि शाला, भोजनशाला, 15 वातानुकूलित कमरे, स्नान घर, भव्य लाइटिंग, म्यूजिक सिस्टम, वेद विद्यालय, भव्य मुख्य द्वार, आदि का निर्माण भी भामाशाह एवं ग्रामवासियों के सहयोग से हुआ है।

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