उप-पंजीयक कार्यालय में पंजीकृत करवाया था कूटरचित दस्तावेज, स्वामी परमानंद भारती आश्रम की संपत्ति का है मामला
Deoli News 17 नवंबर (दैनिक ब्यूरो नेटवर्क) देवली पुलिस ने गहन अनुसंधान और साक्ष्यों के आधार पर एक बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा करते हुए एक शातिर अभियुक्त को गिरफ्तार किया है, जो कूटरचित वसीयतनामे के सहारे करोड़ों रुपए की संपत्ति हड़पना चाहता था।
यह संपत्ति स्वामी परमानंद भारती आश्रम गणेश रोड, देवली से संबंधित है। पुलिस उपअधीक्षक देवली हेमराज मुंड के निर्देशन में दौलत राम गुर्जर, थानाधिकारी देवली दौलतराम गुर्जर के नेतृत्व में की गई। अनुसंधान अधिकारी एएसआई दिलीप सिंह के साथ एक विशेष टीम का गठन किया गया था। प्रकरण की शुरुआत परिवादी सूरज खटीक पुत्र गणेश तंवर निवासी तेली मोहल्ला, देवली की रिपोर्ट से हुई। परिवादी ने बताया कि उनके दादा सुखदेव भारती पुत्र परमानंद भारती की चल-अचल संपत्ति अंबेडकर कॉलोनी जहाजपुर में स्थित है, जिनकी मृत्यु 17 जनवरी 2018 को हो चुकी थी।
जब परिवादी और अन्य वारिसों ने आपसी सहमति से संपत्ति का बंटवारा करने की बात की, तो सुखदेव भारती के पौत्र अमित कुमार पुत्र कन्हैयालाल ने एक पंजीकृत वसीयतनामा प्रस्तुत किया, जिसमें दावा किया गया था कि दादा सुखदेव भारती ने अपने जीवनकाल में सारी संपत्ति उसके नाम कर दी थी। यह वसीयतनामा एक दिसम्बर 2023 को उप-पंजीयक देवली के समक्ष पंजीकृत करवाया गया था। परिवादी द्वारा उक्त पंजीकृत वसीयत की प्रमाणित प्रति प्राप्त करने पर यह ज्ञात हुआ कि अभियुक्त द्वारा प्रस्तुत वसीयत पूर्ण रूप से फर्जी और कूटरचित दस्तावेज है। परिवादी के दादा सुखदेव भारती के हस्ताक्षर और अंगूठा निशानी भी अन्य वास्तविक दस्तावेजों में किए गए हस्ताक्षरों से मेल नहीं खाते थे।
इस तरह अभियुक्त ने आपराधिक षड्यंत्र रचकर धोखाधड़ी की और कूटरचित दस्तावेज तैयार कर उन्हें असली के रूप में प्रयोग करते हुए संपत्ति हड़पने का प्रयास किया। पुलिस ने तत्काल आपराधिक प्रकरण दर्ज कर गहन अनुसंधान शुरू किया। अनुसंधान के दौरान संबंधित व्यक्तियों से पूछताछ की गई, सरकारी कार्यालयों से रिकॉर्ड प्राप्त किया गया, और वैज्ञानिक तकनीकों का सहारा लिया गया।

विधिविज्ञान प्रयोगशाला की सहायता से निश्चयात्मक तथ्य उजागर हुए। अनुसंधान से यह तथ्य पुष्ट हुआ कि आरोपी अमित कुमार ने अपने दादा दिवंगत सुखदेव भारती की मृत्यु के बाद संपत्ति हड़पने की नीयत से एक फर्जी वसीयतनामा तैयार करवाया और उसे उप-पंजीयक देवली के समक्ष रजिस्ट्रीकृत करवाया। यह वसीयतनामा सुखदेव भारती द्वारा कभी भी अमित भारती के हक में संपादित नहीं करवाया गया था। अनुसंधान में यह भी सामने आया कि अभियुक्त अमित कुमार अत्यंत चतुर, चालाक और शातिर है। उसने हर स्तर पर पुलिस को गुमराह करने का प्रयास किया और स्वयं को स्वामी परमानंद भारती आश्रम का गादी बताकर समाज में अपनी धार्मिक प्रमुखता का हवाला देते हुए झूठे तथ्यों को स्थापित करने की नाकाम कोशिश की।
वैज्ञानिक परीक्षण में उसके सारे दावे झूठे पाए गए। जुर्म प्रमाणित होने पर अभियुक्त अमित कुमार पुत्र कन्हैयालाल जाति खटीक, निवासी तेली मोहल्ला देवली को गिरफ्तार कर लिया गया है, जो साधु वेश में रहता है।
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