खामोश मतदाता.. प्रत्याशियों की बढ़ी धुकधुकी!
@राजेन्द्र बागड़ी, वरिष्ठ पत्रकार
Desk News 21 नवम्बर ( दैनिक ब्यूरो नेटवर्क) चुनाव प्रचार खत्म होने में बस दो दिन शेष बचे है। ऐसे में प्रत्याशियों की दौड़ सरपट हो गई है। ज्यादा से ज्यादा गांवों ओर पंचायतों में सम्पर्क अभियान की गति तेज होगई है। आखरी वक्त के चलते अब लोगों में भीतर ही भीतर अपने मन वांछित प्रत्याशियों के प्रति मानस बनने लगा है। लेकिन मतदाताओं के खामोशी अख्तियार कर लेने से देवली-उनियारा विधानसभा क्षेत्र में सभी प्रत्याशियों के दिलों की धुकधुकी बढ़ा दी है।



अब तक विभिन्न दलों के प्रत्याशियों की और से चले चुनाव प्रचार व मिले समर्थन को देखते हुए कहा जा सकता है कि देवली-उनियारा विधानसभा क्षेत्र में चुनाव पूरी तरह त्रिकोणीय बन चुका है। यहां बीजेपी के विजय बैंसला, कांग्रेस के निवर्तमान विधायक हरीश चंद्र मीना व आरएलपी के विक्रम सिंह गुर्जर के बीच कांटे का मुकाबला बन गया है। हालांकि कुछ लोगों का मानना है कि क्षेत्र में मुख्य मुकाबला बीजेपी और कांग्रेस के बीच ही है। ऐसे में चुनाव परिणाम बड़े अप्रत्याशित रह सकते है। कांग्रेस प्रत्याशी को सत्ता विरोधी हालात से जूझना पड़ रहा है तो बीजेपी के विजय बैंसला अब तक क्षेत्र के अधिकांश गांवों तक सपंर्क कायम नही कर पाए है।

जबकि आरएलपी के विक्रम सिंह गुर्जर चूंकि काफी समय से तैयारियों लगे हुए थे। लिहाजा वे जनसम्पर्क के मामले में बढ़त बनाएं हुए है। वही ग्रामीण क्षेत्र में उनकी सभाएं अन्य प्रत्याशियों की नींद उड़ा देने वाली है। मतदान में अब 4 दिन और चुनाव प्रचार खत्म होने में सिर्फ दो दिन शेष बचे है। ऐसे में लोगों की खामोशी जता रही है कि अब लोग अपने वांछित उम्मीदवार को चुनने के लिए मन बनाने लगे है। चुनाव की दृष्टि अब ये चार दिन काफी अहम हो गए है।

देवली शहर में सभी वर्ग के मतदाता है और करीब 15 हजार मतदाताओं वाली नगरपालिका वाले क्षेत्र में मतदाता आमतौर पर पूरी तरह शांत ही नही खामोश भी है। व्यापारिक शहर में इस उम्मीदवार को बढ़त मिलेगी ये कहना फिलहाल जल्दबाजी होगी। लेकिन अगले दो दिनों में शहरी मतदाता अपना मानस बनाएंगे, ऐसा लग रहा है। शहर के विभिन्न स्थानों पर तीनों उम्मीदवारों के बीच चर्चाएं सुनी जारही है। चुनाव का ये अंतिम दौर बहुत खास रहने वाला है। खास तथ्य ये भी है देवली में बीजेपी के विजय बैंसला को छोड़कर किसी भी उम्मीदवार की और से कोई बड़ी चुनावी सभा नही हुई है। कांग्रेस के हरीश चंद्र मीना तो बहुत रहस्यमय तरीके से चुनाव लड़ रहे है। उनकी और से कोई चुनावी रणनीति बाहर निकलकर नही आई है। जबकि बीजेपी के बैंसला ने इन दिनों अपना पूरा ध्यान गांवों पर केंद्रित कर लिया है। आरएलपी के विक्रम सिंह गुर्जर ने भी अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। जिससे पूरे क्षेत्र में चुनाव त्रिकोणीय बन गया है। यदि अगले 4 दिनों तक माहौल ऐसे ही बना रहा तो चुनाव परिणाम बड़े उलटफेर करने वाले साबित होंगे।


देवली-उनियारा विधानसभा क्षेत्र में मतदाताओं के मौन ने जता दिया है कि इस बार चुनाव कांटे के होंगे। असमंजस भरे चुनावी वातावरण किसका पलड़ा भारी है, इस बारे में फिलहाल कुछ भी संकेत देने जल्दबाज़ी होगी।


