Desk News 18 मार्च (दैनिक ब्यूरो नेटवर्क) बाल विवाह की रोकथाम के लिए जिला प्रशासन, बाल अधिकारिता एवं सिकोइडिकोन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित बैठक सोमवार को कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित हुई। इस मौके पर बाल विवाह निषेध जागरूकता रथ को भी रवाना किया गया।
बैठक में सहायक निदेशक बाल अधिकारिता विभाग नवल खान ने बताया कि अक्षय तृतीया, पीपल पूर्णिमा, बडल्या नवमी, देव उठनी, एकादशी, के अवसर पर अबूझ सावा होने के कारण बाल विवाह होने की संभावना अधिक रहती है। जिसकी रोकथाम के लिए बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारियों व विभिन्न हितधारको के साथ चर्चा हुई। जिसमें सभी ने अपने सुझाव रखे। बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 के प्रावधानो पर चर्चा करते हुए बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारियों एवं विभिन्न हितधारको को उनकी जिम्मेदारी से अवगत कराया गया। सहायक निदेशक ने बताया कि बाल विवाह अधिनियम मे बाल विवाह कराने वाले बालक के संरक्षक, विवाह मे सहयोग करने वाले बिचोलिया, पंडित, टेंट हाउस, बैंड बाजा, प्रिटिंग प्रेस, सभी को सजा का प्रावधान है।
“विशेष ग्राम सभा होगी तथा आयु संबंधी लेने होंगे दस्तावेज”
बैठक में बाल विवाह की रोकथाम के लिए विशेष ग्राम सभाओ का आयोजन कराने के लिए निर्देशित किया तथा प्रिंटिंग प्रेस, मैरिज गार्डन, टैन्ट व पण्डित और काजी को वर-वधू के आयु संबंधित दस्तावेज लेने पर ही सेवाएँ देने के लिए जोर दिया। शादी के कार्ड पर वर वधू की जन्म तिथि अनिवार्य रूप से अंकित करने, ऐसे क्षेत्रो व समाजो को चिन्हिकरण करने के लिए कहा। बैठक में जागरूकता के लिए सिकोईडिकोईन के माध्यम से जागरूकता रथ को अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक व उपखण्ड अधिकारी ने हरी झण्डी दिखकार रवाना किया।
बैठक मे अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक गीता चौधरी, उपखंड अधिकारी राहुल सैनी, उपनिदेषक सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग धर्मराज प्रतिहार, बाल कल्याण समिति अध्यक्ष हेमराज चौधरी व सदस्य संदीप कांटिया, मुख्य चिकित्सा एवं स्वा.अधिकारी डॉ. अशोक यादव, श्याम सुन्दर चौहान आदि थे।


