Deoli News 5 अगस्त (दैनिक ब्यूरो नेटवर्क) ज्ञान गंगा महोत्सव के दौरान मुनि प्रणीत सागर ने मंगलवार को धर्मसभा को संबोधित करते हुए समाधि के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि समाधि के समय परिणाम जितने शांत और विशुद्ध रहेंगे, अगला भव उतना ही विशुद्ध होगा।
मुनि कहा कि परिणामों में निर्मलता से भावों की विशुद्धता बढ़ती है और संक्लेश परिणामों की निर्जरा होती है।
बैर मिटाने का संदेश
उन्होंने बताया कि, जीवन के महत्वपूर्ण सूत्र “कर्म कहता है मिटा दो बैर, वर्ना नहीं है तुम्हारी खैर” को साझा किया और सभी से बैर भाव को खत्म करने का आह्वान किया।
ह्रीं” जाप का संकल्प
करीब 475 श्रावकों ने 1650 करोड़ जाप करने का संकल्प लिया। मंगलाचरण, चित्रणावरण, दीपप्रज्वलन और मुनि के पादप्रक्षालन का अवसर शोभागमल परिवार को मिला।


