मुनि अनुपम सागर व यतीन्द्र सागर का ससंघ मंगल प्रवेश
Deoli News 26 जनवरी (दैनिक ब्यूरो नेटवर्क) आचार्य विशुद्ध सागर के शिष्य मुनि अनुपम सागर व मुनि यतीन्द्र सागर का देवली में मंगल प्रवेश हुआ।णमोकार मण्डल के सदस्य ओमप्रकाश जैन (टोरडी) ने बताया कि मुनि संघ का इंदौर के लिए विहार चल रहा है।

अल्प प्रवास का अवसर देवली समाज को मिला। मुनि ने पार्श्वनाथ मन्दिर पटेल नगर, शांतिनाथ मन्दिर विवेकानन्द कॉलोनी दर्शन करते हुए पार्श्वनाथ धर्मशाला पहुंचे। उन्होंने धर्मसभा में प्रवचन किए। सर्वप्रथम द्वीप प्रज्वलन, पाद प्रक्षालन एवं शास्त्र भेंट, शांतिनाथ युवा मंडल के सदस्यों द्वारा किया गया। मुनि यतीन्द्र सागर कहा कि हमारे लिए क्या खाने योग्य है, क्या नही अभक्ष्य पदार्थो में अनन्त शुक्ष्म जी होते है, जो की हमें दिखाई नही देते। लेकिन उनकी उपस्थिति उन पदार्थ में होती है। अतः उन पदार्थ का त्याग करना जरूरी है। मुनि अनूपम सागर ने ताश के खेल से धर्म का महत्व बताया एवं कहा कि समाज के अध्यक्ष हो या परिवार का मुखिया हो, उसे सदैव बिलोने में लगी मथनी के रस्सी की तरह लपेटकर रखना चाहिए न की बांध के रखना चाहिए, जिस तरह से रस्सी को बैलेंस कर छाछ में से घी निकल जाता है। उसी तरह परिवार को भी बैलेंस कर के चलना चाहिए। धर्मसभा के दौरान बाहर से आए अतिथि का स्वागत-सम्मान समाज द्वारा किया गया।
मुनि संघ का पड़गाहन शांतिनाथ मन्दिर के बाहर हुआ। जिससे संघ की आहारचर्या सम्पन्न हुई। विकास जैन बताया कि मुनि यहां प्रवास के दौरान प्रतिदिन शाम को जीवन से जुड़े, परिवार से जुड़े कई सुलझे-अनसुलझे किस्सो के बारे में विशेष प्रवचन के दौरान जीवन जीने की कला बताएंगे।


