Thursday, April 16, 2026
No menu items!
spot_imgspot_imgspot_imgspot_img
HomeBisalpur damसुरक्षा को धता !! गम्भीर लापरवाही पैदा कर सकती है सरकार के...

सुरक्षा को धता !! गम्भीर लापरवाही पैदा कर सकती है सरकार के लिए चुनौती

अधिकारियों ने क्यों आंखे मूंद रखी?

@राजेन्द्र बागड़ी


Deoli News 29 जुलाई (दैनिक ब्यूरो नेटवर्क) स्कॉडा सिस्टम पर खास मेहमानों की आवभगत और डेम के गेटों पर सेल्फी, वीडियो, रील बनाने का जुनून सरकार के लिए कभी भी गम्भीर समस्या पैदा कर सकती है। वहीं डेम के ऊपर घूमते ड्रोन बांध की सुरक्षा का खतरा पैदा कर रहे है।

सारी कारगुजारियों के वीडियो साबित करते है कि बीसलपुर परियोजना के अधिकारी डेम साइट पर तैनात ही नही है! यदि होते तो क्या वे इसकी इजाजत देते? डेम की सुरक्षा के लिए परियोजना हर वर्ष सुरक्षा गार्डों को हायर कर लाखों का भुगतान करती है फिर इतना होने पर भी सुरक्षा गार्ड कहां है, ये सवाल भी पूछा जाना लाजमी है। जयपुर, अजमेर सहित दर्जनों नगरों, शहरों की लाइफ लाइन को परियोजना के अधिकारी “मख़ौल” बना देंगे तो फिर डेम की सुरक्षा तो गई भाड़ में! अव्वल तो ये डेम कई दृष्टि से अतिमहत्वपूर्ण है। लेकिन शायद अधिकारी ये नही समझते या फिर समझना नही चाहते। आज दो दृश्य ऐसे देखे गए है, जो जानकर लोगों को हिलाते ही नही झकझोर रहे है, सरकार और प्रशासन ने क्या कदम उठाए, ये सवाल आखरी का है लेकिन ये आपसी मिलीभगत डेम की सुरक्षा के लिए ” चूक” बन गई है।

परियोजना के अधिकारी कैसे आंखे मूंद कर बैठे रहे ये सवाल सबसे अव्वल है। ईश्वर न करे ऐसा हो पर कल्पना कीजिए कि डेम साइट पर कोई हादसा हुआ तो इसका जिम्मेदार कौन होगा, बीसलपुर के अधिकारी तो ये कहकर पल्लू झाड़ लेंगे कि डेम की सुरक्षा का काम उनका नही गार्डो का है, उधर, तैनात गार्ड ये कहकर पिंड छुड़ाने का प्रयास करेंगे कि वे क्या करें उन्हें ऐसे आदेश ही नही थे। भगवान न करे यदि कोई घटना हुई तो बांध स्थल जल्द ही धरना प्रदर्शन का केंद्र और 50 लाख रुपए, नौकरी दिलाने का मंच बन जाएगा। इस समय डेम के 6 गेट खुले है बहाव भीषण है, करीब 76 हजार क्यूसेक पानी प्रति सेकेंड डाउन स्ट्रीम में छोड़ा जा रहा है, जिससे बनास नदी में भारी उफान की स्थिति बनी हुई है।

अंदाजा लगाया जा सकता है कि यदि हादसा हुआ तो मुसीबत डेम के अधिकारियों पर नही प्रशासन पर ही आनी है। सारे जरूरी काम छोड़कर पहले “रेस्क्यू” चलाना पड़ेगा फिर धरने, प्रदर्शन और सरकार से बेइंतहा मांगे सरकार ही नही प्रशासन को भी सांसत में डालेगी। जिसकी कल्पना ही की जा सकती है। बीसलपुर परियोजना के अधिकारी ये कहकर पल्लू नही झाड़ नही सकते कि क्या करें भीड़ बेकाबू थी! बीसलपुर के अधिकारियों की “ओब्लाइज पॉलिसी” कही भारी न पड़ जाएं, ये सोचनीय बात है। डेम का ” नियंत्रण कक्ष” बेहद महत्वपूर्ण स्थान है, इसे कतई खास पर्यटकों के सेर सपाटे का स्थान बनाना उचित नही। नियंत्रण कक्ष में ” स्कॉडा सिस्टम” है, जहाँ से पानी की आवक और डिस्चार्ज दर्ज ही नही होती, बल्कि गेटों को भी यहीं से खोला जाता है। जाहिर है ये कितना महत्वपूर्ण है।

डेम की सुरक्षा के साथ किस तरह का खिलवाड़ हो रहा है, बेहद चिंताजनक है। प्रशासन को तत्काल दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई करनी चाहिए। ऐसे लोगो को हटाया जाना चाहिए, ये मामला ” डेम की सुरक्षा प्रोटोकॉल” का है। गम्भीर लापरवाही बरतने वालो को यूँ ही बख्श दिया तो आगे जाकर फिर बड़ी गलतियां होगी, ये तय है। सरकार बीसलपुर डेम को सिर्फ डेम रहने दीजिए।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

%d