Deoli News 2 जनवरी (दैनिक ब्यूरो नेटवर्क) श्रीराम कथा में गुरुवार को पुष्प मुरारी बापूने केवट प्रसंग सुनाया। उन्होंने केवट के पूर्व जन्म का भी परिचय दिया।
उन्होंने बताया कि पूर्व जन्म में केवट एक कछुआ था। केवट प्रसंग धार्मिक और भक्तिपूर्ण प्रसंग है। इसके आगे भगवान दंडक वन में विहार करने के लिए गए। वहां स्वरूप आखा का वृतांत सुनाया। उन्होंने कहा कि जब भक्ति में हम परिपूर्ण हो जाते हैं तो भगवान भी हमारा भजन करने लगते हैं। भगवान हमारा पल-पल पर ध्यान रखते हैं। मुरारी बापू ने कथा में सीता हरण का प्रसंग सुनाया और इसके बाद में शबरी के लिए नवधा भक्ति का उपदेश दिया। जिसमें संतों की दो-दो बार प्रशंसा की गई। भगवान की कथा को श्रवण करना सर्वोपरि भक्ति है। शबरी में तो नौ प्रकार की भक्ति थी। लेकिन रामजी ने फिर भी उसको नवधा प्रकार की भक्ति का उपदेश दिया। शुक्रवार को राम राज्याभिषेक तक की कथा श्रवण कराई जाएगी और कथा को विश्राम दिया जाएगा।



