Thursday, April 23, 2026
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प्रवचन में मुनि ने 6 प्रकार के चक्षुओं का किया उल्लेख, महामस्तकाभिषेक 10 अगस्त को


Deoli News 7 अगस्त (दैनिक ब्यूरो नेटवर्क) यहां पार्श्वनाथ धर्मशाला में चल रहे स्मृति परिवर्तन चातुर्मास के तहत गुरुवार को मुनि प्रणीत सागर महाराज ने धर्मसभा को संबोधित किया।

उन्होंने मान कषाय के गलन का महत्व बताया और कहा कि आगम से अपने कल्याण का भेद विज्ञान करने वाला ही साधु है, और दिगम्बर मुनिराज का आगम ही चक्षु है। मुनि ने 6 प्रकार के चक्षुओं का उल्लेख किया, जिनमें से दिगम्बर मुनि-माताजी आगम चक्षु का प्रयोग करते हैं। इस दौरान मुनियों का चित्र अनावरण एवं दीप प्रज्ज्वलन भी किया गया। विकास जैन ने बताया 9 अगस्त को रक्षाबंधन पर पार्श्वनाथ धर्मशाला में मुनि को 51 फीट की राखी श्रावकों द्वारा भेंट की जाएगी। साथ ही श्रेयांसनाथ भगवान का मोक्षकल्याणक दिवस भी मनाया जाएगा। 

त्रय जिनबिम्ब महामस्तकाभिषेक 10 अगस्त को

आगामी 10 अगस्त सुबह 7:15 बजे से श्री पार्श्वनाथ जैन मंदिर पटेल नगर में त्रय जिनबिम्ब महामस्तकाभिषेक का आयोजन होगा। इस आयोजन में सकल जैन समाज के श्रावक-श्राविकाओं और बालक-बालिकाएं भाग लेंगी। वहीं 8 वर्ष से ऊपर के सैकड़ों बालकों द्वारा कलशाभिषेक और शांतिधारा की जाएगी। इसके बाद महाराज के प्रवचन होंगे। यह जानकारी मीडिया प्रभारी राजीव जैन ने दी।

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