Deoli News 22 मई (दैनिक ब्यूरो नेटवर्क) राजस्व विभाग के कर्मचारियों की कथित लापरवाही का एक बड़ा खामियाजा क्षेत्र के एक किसान को भुगतना पड़ रहा है। जहाँ एक ओर सरकार किसानों को राहत देने के दावे करती है।
वहीं दूसरी तरफ धरातल पर बैठे जिम्मेदार कर्मचारी दफ्तरों से बाहर निकले बिना ही कागजी रिपोर्ट तैयार कर रहे हैं। ऐसा ही एक मामला जहाजपुर तहसील के लुहारीकलां गाँव से सामने आया है, जहाँ एक पटवारी द्वारा बिना मौका मुआयना किए दफ्तर में बैठकर ही गलत गिरदावरी रिपोर्ट तैयार करने का आरोप लगा है। मामले के अनुसार लुहारीकलां निवासी पीड़ित किसान नन्दलाल मीणा ने अपनी खातेदारी भूमि पर इस रबी फसल सत्र में गेहूँ की फसल बोई थी, जिससे उन्हें करीब 360 बोरी गेहूँ की अच्छी-खासी पैदावार भी हासिल हुई। आरोप है कि लेकिन तत्कालीन पटवारी ने मौके पर जाने करने के बजाय पटवार-भवन में बैठकर ही अनुमानित तरीके से खसरा-गिरदावरी रिपोर्ट तैयार कर दी। इस कागजी लापरवाही के कारण रिकॉर्ड में वास्तविक फसल गेहूँ के स्थान पर सरसों और चना की फसल काश्त करना दर्ज कर दिया गया।
इस बड़ी गड़बड़ी का नतीजा यह हुआ कि पीड़ित किसान कृषि-मंडी के ऑनलाइन पोर्टल पर अपने गेहूँ को सरकारी समर्थन-मूल्य पर बेचने से पूरी तरह वंचित हो गया है। किसान ने बताया कि पोर्टल बंद होने की कगार पर है, जिससे किसान को अपनी उपज सही दाम पर न बेच पाने और भारी आर्थिक नुकसान होने का डर सता रहा है। पीड़ित ने इस संबंध में पहले जहाजपुर तहसीलदार से भी शिकायत की थी, जिसके बाद नायब तहसीलदार ने मौके पर आकर जाँच भी की, लेकिन इसके बावजूद राजस्व-रिकॉर्ड में सुधार नहीं किया गया।
थक-हारकर और तहसील कार्यालय के चक्कर काटकर परेशान हुए पीड़ित किसान ने पिछले दिनों जिला कलक्टर भीलवाड़ा को प्रार्थना-पत्र सौंपकर न्याय की गुहार लगाई है और मांग की है कि राजस्व रिकॉर्ड में तत्काल सुधार करवाकर गेहूँ की फसल दर्ज करने के आदेश जारी किए जाएं। लेकिन अभी तक परिवादी को राहत नहीं मिली।


