हर किसी की अपनी जमीन, अपना दावा… उप जिला अस्पताल का सपना कब होगा साकार?
@आशीष बागड़ी
Deoli News 29 जुलाई (दैनिक ब्यूरो नेटवर्क) करीब एक वर्ष से अधिक समय पहले 35 करोड़ रुपए की लागत से स्वीकृत राजकीय उप जिला अस्पताल का नया भवन आज भी भूमि चयन की प्रक्रिया में उलझा हुआ है। जिस परियोजना से क्षेत्र की स्वास्थ्य सेवाओं को नई दिशा मिलने की उम्मीद थी, वह अब जनचर्चा, दावों, विरोध और खींचतान का विषय बन गई है।
हालात ऐसे हैं कि शहर का लगभग हर व्यक्ति अपने-अपने नजरिए से अस्पताल के लिए उपयुक्त स्थान तय कर रहा है और पूरी प्रक्रिया आमजन की नजर में किसी तमाशे से कम नहीं लग रही। अस्पताल निर्माण को लेकर फिलहाल दो स्पष्ट पक्ष सामने हैं। एक पक्ष जयपुर रोड पर प्रस्तावित लगभग 10 बीघा भूमि को तकनीकी रूप से उपयुक्त बताते हुए वहीं अस्पताल निर्माण की मांग कर रहा है। उनका कहना है कि भविष्य में विस्तार, पार्किंग, आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं और बेहतर आधारभूत ढांचे के लिए पर्याप्त भूमि केवल वहीं उपलब्ध है। दूसरी ओर शहर के नागरिकों, सामाजिक संगठनों और कई जनप्रतिनिधियों का मत है कि उप जिला अस्पताल शहर के भीतर अथवा वर्तमान अस्पताल के आसपास ही बनाया जाना चाहिए।
उनका तर्क है कि अस्पताल शहर के मध्य रहेगा तो मरीजों, बुजुर्गों, महिलाओं और आपातकालीन स्थिति में आने वाले लोगों को तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध हो सकेगी। उनका यह भी कहना है कि शहर में विभिन्न विभागों के परिसरों में ऐसी सरकारी भूमि उपलब्ध है, जहां अस्पताल का निर्माण किया जा सकता है। हालांकि प्रशासनिक और व्यावहारिक दृष्टि से किसी अन्य विभाग की भूमि को स्वास्थ्य विभाग के नाम हस्तांतरित करना आसान प्रक्रिया नहीं है। इसमें विभागीय स्वीकृतियों, राजस्व प्रक्रियाओं और अनेक प्रशासनिक औपचारिकताओं से गुजरना पड़ता है, जिससे परियोजना लंबे समय तक अटक सकती है। यही कारण है कि इस विकल्प को लेकर भी कई व्यवहारिक चुनौतियां सामने हैं।
इस पूरे विवाद के बीच सबसे अधिक परेशानी आम मरीजों और अस्पताल के चिकित्सकों एवं स्वास्थ्यकर्मियों को उठानी पड़ रही है। वर्तमान उप जिला अस्पताल वर्षों पुराने सीमित भवन में संचालित हो रहा है, जहां मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन सुविधाओं और स्थान का विस्तार नहीं हो पाया है। यहां एक रात में ही करीब चार दर्जन मरीजों का प्रतिदिन ओपीडी है। इमरजेंसी वार्ड तक सामान्य गलियारे जैसा दिखाई देता है। सीमित जगह में मरीजों, परिजनों और स्वास्थ्यकर्मियों की भीड़ के कारण उपचार व्यवस्था प्रभावित हो रही है। उप जिला अस्पताल का दर्जा मिलने के बावजूद भवन और संसाधन उस स्तर के अनुरूप विकसित नहीं हो सके हैं। गौरतलब है कि भूमि चयन को लेकर पहले भी कई दौर की चर्चाएं और निरीक्षण हो चुके हैं। प्रशासन ने छह सदस्यीय समिति का गठन कर विभिन्न स्थलों का परीक्षण कराया है। सूत्रों का कहना है कि फिलहाल कमेटी ने किसी तरह की कोई रिपोर्ट तैयार नहीं की है और ना ही प्रस्तुत की गई है। लेकिन अब अंतिम निर्णय का कमेटी की रिपोर्ट का रहेगा।

अपनी अपनी जगहों पर बने अपने-अपने उपजिला अस्पताल
इस बीच सोशल मीडिया पर भी यह मुद्दा चर्चा का केंद्र बना हुआ है। लोग एआई की मदद से अपनी पसंद की जगहों व क्षेत्रों पर अस्पताल के काल्पनिक भवनों के चित्र बनाकर साझा कर रहे हैं। इससे यह विषय और अधिक चर्चा में जरूर आया है, लेकिन वास्तविक समाधान अब भी दूर नजर आ रहा है।सवाल यह नहीं है कि अस्पताल किस स्थान पर बनेगा, बल्कि यह है कि आखिर निर्णय कब होगा। लगभग एक वर्ष से अधिक समय से चल रही प्रक्रिया ने लोगों की उम्मीदों को इंतजार में बदल दिया है। यदि जल्द निर्णय नहीं हुआ तो 35 करोड़ रुपए की यह महत्वपूर्ण स्वास्थ्य परियोजना भी अनावश्यक विवादों और लंबी प्रशासनिक प्रक्रियाओं में उलझ सकती है।
देवली क्षेत्र की जनता अब किसी नए तर्क या नए विवाद की नहीं, बल्कि एक ठोस निर्णय की प्रतीक्षा कर रही है। निर्णय ऐसा होना चाहिए जिसमें भविष्य की स्वास्थ्य आवश्यकताओं, आमजन की सुविधा और प्रशासनिक व्यवहारिकता तीनों का संतुलन हो। आखिर अस्पताल किसी एक मोहल्ले या क्षेत्र का नहीं, बल्कि पूरे उपखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था का आधार होता है। लिहाजा अब समय आ गया है कि भूमि चयन के इस लंबे तमाशे पर विराम लगे और नए उप जिला अस्पताल के निर्माण का सपना धरातल पर उतरना शुरू हो।


