शिव बारात, पुष्प वर्षा और फूलों की चादर… निशा बाई के स्वागत में उमड़ा देवली
(लाइव कवरेज)
Deoli News 24 अगस्त (दैनिक ब्यूरो नेटवर्क) पैरों में छाले, शरीर थका हुआ, लेकिन मन में भगवान शिव के प्रति अटूट आस्था और हौसला… करीब 700 से 750 किलोमीटर की कठिन पैदल कांवड़ यात्रा पूरी कर हरिद्वार से पवित्र गंगाजल लेकर लौटीं निशा बाई किन्नर के स्वागत में सोमवार को देवली शहर उमड़ पड़ा। शहर के बाहर से लेकर अर्धनारीश्वर मंदिर तक पुष्प वर्षा, ढोल-नगाड़ों, हर-हर महादेव के जयकारों और सजीव शिव बारात के बीच ऐसा भक्तिमय माहौल बना कि हर कोई निशा बाई के साहस और तपस्या को सलाम करता नजर आया।

सनातन संस्कृति के रंगों से सराबोर एक ऐसा दृश्य सोमवार को देवली में देखने को मिला, जब हरिद्वार से पैदल कांवड़ यात्रा पूरी कर गंगाजल लेकर लौटी निशा बाई किन्नर का शहरवासियों ने भव्य और भावपूर्ण स्वागत किया। शहर के बाहर से लेकर अर्धनारीश्वर मंदिर तक श्रद्धालुओं का हुजूम उमड़ पड़ा। जगह-जगह पुष्प वर्षा, ढोल-नगाड़ों की गूंज, भगवान शिव के जयकारों और भजनों पर नृत्य के बीच निशा बाई का अभिनंदन किया गया। स्वागत की भव्यता ऐसी रही कि शहर ने मानो उनके सम्मान में पलक पांवड़े बिछा दिए। उल्लेखनीय है कि निशा बाई किन्नर ने गत 25 जुलाई को देवली के तेजाजी मोहल्ला स्थित अर्धनारीश्वर मंदिर से विधिवत पूजा-अर्चना करने तथा अपनी गुरु पायल का आशीर्वाद लेने के बाद हरिद्वार से गंगाजल लाने के लिए कांवड़ यात्रा प्रारंभ की थी।

हरिद्वार पहुंचने के बाद करीब 700 से 750 किलोमीटर की लंबी और कठिन यात्रा उन्होंने पैदल पूरी की। हरिद्वार पहुंचकर गंगाजल भरने के बाद निशा बाई विभिन्न राज्यों और प्रमुख शहरों से होते हुए सोमवार को वापस देवली पहुंचीं। यह यात्रा केवल एक धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि निशा बाई के अदम्य साहस, दृढ़ संकल्प और भगवान शिव के प्रति अटूट विश्वास का भी उदाहरण बनी। लंबी पदयात्रा के दौरान उनके पैरों में छाले पड़ गए, शरीर भी कमजोर पड़ गया, लेकिन भगवान शिव के प्रति उनकी आस्था और मनोबल में कोई कमी नहीं आई।

कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने अपनी यात्रा जारी रखी और गंगाजल लेकर देवली पहुंचीं। कई श्रद्धालु निशा बाई से मिलकर उनकी इस कठिन तपस्या और जज्बे को देखकर भावुक हो उठे। देवली ही नहीं पूरे यात्रा मार्ग में जगह-जगह श्रद्धालुओं ने निशा का खूब अभिनंदन किया। देवली से कई लोग यात्रा में मिलने तक पहुंचे। निशा बाई के देवली पहुंचने पर नगर पालिका के बाहर उनका भव्य स्वागत किया गया। इस दौरान निर्वतमान नगर पालिका अध्यक्ष नेमीचंद जैन, भाजपा नेता मनोज शर्मा सहित कई जनप्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और शिवभक्तों ने पुष्प वर्षा कर कांवड़ यात्रा का अभिनंदन किया। इसके बाद निशा बाई के स्वागत में एक विशाल शोभायात्रा निकाली गई, जिसमें शहरवासियों की भारी भीड़ शामिल हुई। शोभायात्रा की विशेष बात भगवान शिव की सजीव झांकी और शिव बारात रही।
भगवान शिव की वेशभूषा में श्रद्धालु त्रिशूल धारण कर नृत्य करते हुए चल रहे थे। शिवगणों के रूप में सजे कलाकारों ने भी शोभायात्रा को आकर्षक बनाया। भगवान शिव के भजनों की धुन पर श्रद्धालु जमकर झूमे और नृत्य किया। शोभायात्रा के दौरान प्रतीकात्मक रूप से भस्म आरती का भी आयोजन किया गया। वहीं एक श्रद्धालु भगवान शिव के महाकाल स्वरूप और शिवलिंग के प्रतीक को लेकर चल रहा था, जिसने शिवभक्ति के माहौल को और अधिक आध्यात्मिक बना दिया। सावन मास के चौथे सोमवार के पावन अवसर ने इस आयोजन को और भी विशेष बना दिया। शिवभक्तों का जनसैलाब शोभायात्रा में उमड़ पड़ा और पूरे मार्ग में हर-हर महादेव के जयकारे गूंजते रहे। जगह-जगह श्रद्धालुओं ने निशा बाई और शोभायात्रा का स्वागत किया। भगवान शिव की सजीव झांकी पर पुष्प वर्षा की गई तथा श्रद्धालुओं को फल और पानी की बोतलों का वितरण किया गया। कई स्थानों पर ठंडे पानी सहित अन्य सेवाओं की व्यवस्था भी की गई। शोभायात्रा में शामिल श्रद्धालुओं की सेवा के लिए शहरवासी पूरे उत्साह के साथ जुटे रहे।
इस दौरान निशा बाई के स्वागत का एक भावुक और अनूठा दृश्य भी देखने को मिला, जब उन्हें फूलों की चादर के नीचे सम्मानपूर्वक अर्धनारीश्वर मंदिर तक ले जाया गया। फूलों से सजी इस चादर को उठाने के लिए महिलाओं में विशेष उत्साह दिखाई दिया और बड़ी संख्या में महिलाएं शोभायात्रा में शामिल हुईं। महिलाओं ने भजनों पर नृत्य कर शिवभक्ति का उत्साह प्रदर्शित किया। निशा बाई के प्रति शहरवासियों का स्नेह और सम्मान देखकर उनकी आंखें भी कई बार नम हो गईं। शोभायात्रा में जूडो-कराटे का प्रशिक्षण लेने वाले विद्यार्थियों ने सुरक्षा घेरा बनाकर व्यवस्था संभाली। श्रद्धालुओं की भीड़, वाहनों का काफिला और शिवभक्ति में डूबे लोगों का उत्साह इस कांवड़ यात्रा के ऐतिहासिक बनने का गवाह बना। पूरा वातावरण सनातन संस्कृति, धार्मिक आस्था और सामाजिक एकता का संदेश दे रहा था।
उल्लेखनीय है कि निशा बाई किन्नर स्वयं अर्धनारीश्वर स्वरूप में आस्था रखती हैं और हरिद्वार से लाए गए पवित्र गंगाजल से भगवान अर्धनारीश्वर का अभिषेक करेंगी। उनकी इस कठिन कांवड़ यात्रा और देवली में हुए अभूतपूर्व स्वागत ने शहरवासियों को भावुक कर दिया। निशा बाई के साहस, तपस्या और भगवान शिव के प्रति अटूट विश्वास की चर्चा पूरे शहर में होती रही।



