समय रहते योजना बनाई जाए तो होगा बेहतर
Deoli News 9 नवंबर (दैनिक ब्यूरो नेटवर्क) शहर में हर बार दीपावली पर्व खुशियों व उल्लास की किरणे लेकर आता है। लेकिन दीवाली के अगले दिन गोवर्धन पूजन की रात शहर में चल रही बरसों पुरानी आतिशबाजी फेंकने की परंपरा लोगों को दहलाने वाली होती है। जिसे रोकना जरूरी होगा।

वहीं इसे रोकना पुलिस व प्रशासन के लिए चुनौतीपूर्ण होगा। हालांकि प्रशासन व पुलिस के लिए यह कठिन नहीं है। लेकिन इसके लिए पूर्व योजना बनानी होगी। उल्लेखनीय है कि हर वर्ष गोवर्धन पूजन की रात देवली शहर में लोग परिवार सहित आतिशबाजी करते हैं। दीपावली पर पूजन व मेल मिलाप की वजह से वक्त नहीं मिलने के कारण अगले दिन गोवर्धन पूजन की रात आतिशबाजी की जाती है। लेकिन देवली शहर में वर्षों पुरानी एक जानलेवा व घातक गलत परंपरा चल रही है। इसके तहत युवक अलग-अलग टोली बनाकर एक दूसरे पर आतिशबाजी फेंकते हैं।
यह नजारा बेहद भयावह होता है। हालांकि हर वर्ष पुलिस गश्त कर इन युवाओं को खदेड़ने का प्रयास करती है। लेकिन पुलिस को सफलता नहीं मिल पाती। कई बार देखा गया कि यह युवक पुलिस की पर भी आतिशबाजी जलाकर फेंक देते हैं। नतीजन पुलिसकर्मियों को भी इससे बचने के लिए भागना पड़ता है। ऐसे में पुलिस व प्रशासन को समय रहते पूर्व योजना बनाकर इस परंपरा को तोड़ने के लिए प्लानिंग करनी होगी। दरअसल आतिशबाजी फेंकने से जहां लोगों की जान पर बनी रहती है। वहीं दूसरी ओर अग्निकांड का भी खतरा रहता है।

“यह क्षेत्र होते हैं ज्यादा प्रभावित”
गोवर्धन पूजन की रात आतिशबाजी फेकने का दौरा यूं तो सभी क्षेत्रों में देखा जाता है। खासकर शहर के तेली मोहल्ला, पुलिस थाने के पीछे, घोसी मोहल्ला, छतरी चौराया, थाने से आगे का मुख्य बाजार, गांधी पार्क, अंबेडकर सर्कल, वाल्मीकि बस्ती, नेकचाल रोड सहित क्षेत्र में यह हरकत ज्यादा देखी जाती है। ऐसे में पुलिस प्रशासन को इन पर रोक लगाने के लिए अतिरिक्त जाप्ते की मदद लेकर प्रयास करने होंगे। उल्लेखनीय की आतिशबाजी फेंकने की परंपरा से कई लोग पूर्व में झुलस चुके हैं।
“जाप्ते की मदद लेकर रोकेंगे परंपरा”
शहर में यदि आतिशबाजी फेंकने की गलत परंपरा है तो पूर्व योजना बनाएंगे। अतिरिक्त जाप्ता लगाकर ऐसे युवकों को खदेड़ा जाएगा। इससे पहले संदिग्ध लोगों को पाबंद करेंगे, ताकि घटना की पुनरावृत्ति ना हो।


