Thursday, April 23, 2026
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HomeDainik Bureau Deskचिकित्सालय जैसे जनहित के लिए जमीन देने में आखिर कैसा भ्रष्टाचार!

चिकित्सालय जैसे जनहित के लिए जमीन देने में आखिर कैसा भ्रष्टाचार!

  • उप जिला चिकित्सालय की जमीन के विवाद को लेकर प्रेस कॉन्फ्रेंस

  • पालिका अध्यक्ष व पार्षदों ने दिया समर्थन

@आशीष बागड़ी

Deoli News 3 अगस्त (दैनिक ब्यूरो नेटवर्क) राज्य बजट में घोषित देवली उप जिला चिकित्सालय की जमीन के प्रस्ताव को लेकर चल रहे आरोप प्रत्यारोप के बीच शनिवार दोपहर 3 बजे पालिका अध्यक्ष नेमीचंद जैन व पार्षदों ने पत्रकार वार्ता की। पालिका अध्यक्ष ने कहा कि चिकित्सालय की जमीन को लेकर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया गया है।

आखिर उन्हें अभी तक यह समझ नहीं आया कि चिकित्सालय जैसे जनहित के काम के लिए नि:शुल्क जमीन देना आखिर कैसे भ्रष्टाचार हो सकता है। जयपुर व टोंक से आई टीम के साथ देवली के प्रशासनिक अधिकारियों व चिकित्सा विभाग की टीम ने करीब पांच जगह पर उप जिला चिकित्सालय की संभावना तलाश की। इनमें तीन भूमि नगर पालिका क्षेत्र की है। इसके अलावा डाक बंगला, कृषि उपज मंडी, बीसलपुर कॉलोनी समेत क्षेत्र है। उक्त टीम ने ही सब विकल्प देखने के बाद जयपुर रोड पर प्रस्तावित भूमि को उप जिला चिकित्सालय के लिए चिन्हित किया है। ऐसे में लगाए भ्रष्टाचार का आरोप गलत है। उन्हें तो भूमि चिन्हित करने का पता ही बाद में लगा। उक्त टीम ने कुचलवाड़ा माताजी क्षेत्र, अंबापुरा से भीतर 400 मीटर अंदर, रीको एरिया समेत क्षेत्र में विकल्प देखने के बाद यह निर्णय किया है। यहां तक की उक्त भूमि के समीप के खातेदार विनोद कुमार ने पालिका के आग्रह पर 60 फीट का रास्ता डोनेट किया है, ताकि लोगों को चिकित्सालय की यह सुविधा मिल सके।

विरोध करने वाले लोगों को यह पता नहीं है कि आखिर वे विरोध क्यों कर रहे हैं। पालिका अध्यक्ष नेमीचंद जैन ने कहा कि सरकार को भूमि अलॉट करने में आखिर उन्हें क्या फायदा होगा। उनकी सोच है कि करीब 8 बीघा परिसर में बनने वाले ऐतिहासिक चिकित्सालय के लिए ऐसी जमीन हो, जहां भविष्य की संभावना भी पूरी होती हो। उन्होंने कहा कि मंडल के पार्षद विचार कर ले। यदि वे जगह बदलना चाहे तो सहमति दे तथा विकल्प पालिका की समक्ष रखें। पालिका उपाध्यक्ष सौरभ जिंदल ने कहा कि कुछ लोग देवली शहर के कार्यालय को चिकित्सालय के रूप में काम में लेने की बात कर रहे हैं। लेकिन किसी अन्य विभाग की जगह लेना आसान नहीं है। उप जिला चिकित्सालय के लिए लंबा चौड़ा परिसर चाहिए, चौड़ा मार्ग जरूरी है और चिन्हित की गई जगह शहर से सबसे करीब है। इसके अलावा कोई विकल्प नहीं है। फिलहाल करीब 41 करोड रुपए चिकित्सालय निर्माण के लिए आए हैं। यह ऐतिहासिक कदम होगा। पार्षद भीमराज जैन ने कहा कि टीम जहां भी गई, उन्हें सब जगह कुछ न कुछ परेशानी दिखाई दी। अंत में उन्हें यही जगह चिन्हित करनी पड़ी और इसका फायदा सभी को मिलेगा।

किसी भी विभाग की जमीन लेना इतना आसान नहीं है। पार्षद विनोद पुजारी ने कहा कि यह जमीन शहर से डेढ़ किलोमीटर की दूरी पर है। इससे करीब और उपयुक्त भूमि नहीं मिल सकती। बैठक में उपस्थित सभी पार्षदों चिकित्सालय की भूमि के प्रस्ताव पर सहमति दी। बैठक को पार्षद पंकज जैन लोकेश लक्षकार, दुर्गेश नंदन साहू, भीम सिंह, शानू अब्बासी, प्रताप विश्वास समेत ने संबोधित किया और सहमति दी। यहां पालिका अध्यक्ष व उपाध्यक्ष के अलावा 13 पार्षद थे।

.80 बीघा से अधिक जमीन हो तो डोनेट कर दूंगा

उप जिला चिकित्सालय की नई भूमि के पास पालिका अध्यक्ष की जमीने होने के सवाल पर नेमीचंद जैन ने कहा कि लोगों के लगाए आरोप निराधार है। उनके परिवार की जयपुर रोड से लेकर रीको औद्योगिक क्षेत्र तक केवल .80 बीघा जमीन है। यदि इससे अधिक कोई जमीन साबित कर दें तो वह यह जमीन डोनेट करने को तैयार है। लोग 120 बीघा जमीन बता रहे हैं। जबकि मौके पर पूरे क्षेत्र की जमीन इतनी नहीं है। पूर्व पार्षद विनोद खूटेटा ने भी इस जमीन को उपयुक्त बताया। जिससे कि भविष्य में जिला अस्पताल की पूर्ति भी हो सके।

बैठक से निकलने के बाद बदला विचार

पालिका अध्यक्ष नेमीचंद जैन ने कहा कि गत 29 जुलाई को आयोजित हुई साधारण सभा में चिकित्सालय की जमीन को लेकर सर्वसम्मति से प्रस्ताव लिया गया। इसमें कुछ पार्षदों ने इसे अच्छा कार्य बताते हुए सर्वसम्मति दी। लेकिन सभागार से बाहर निकालने के बाद ही उनके सुर बदल गए। आखिर वे क्या चाहते हैं, यह पता नहीं लगा। वे पार्षद प्रेस कॉन्फ्रेंस में भी नहीं आए।

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