आचार्य का 72वां समाधि दिवस मनाया
Deoli News 12 सितंबर (दैनिक ब्यूरो नेटवर्क) प्रथमाचार्य 108 शांतिसागर महाराज का 72वां समाधि दिवस शनिवार को विनयांजलि कार्यक्रम के साथ मनाया गया। इस अवसर पर मुनि सुप्रभसागर महाराज ने कहा कि एक साधक अपने जीवन का अंत भी महोत्सवपूर्वक करता है।
दिगंबर जैन श्रमण परंपरा को पुनर्जीवित करने वाले आचार्य शांतिसागर ने अपने संयमी जीवन की पूर्णाहुति सल्लेखना मरण महोत्सव के साथ की थी। उनका पूरा जीवन सभी के लिए शिक्षाप्रद है। मुनि ने कहा कि कई लोग आर्ट ऑफ लिविंग सिखाते हैं, लेकिन जैन दर्शन आर्ट ऑफ लिविंग के साथ आर्ट ऑफ डाइंग भी सिखाता है, यानि जीवन जीने के साथ प्राण त्यागने का सही संदेश दिया जाता है। जैन श्रमण अपने संयम की रक्षा के लिए शरीर तक छोड़ने को तैयार रहते हैं। आचार्य शांतिसागर ने 36 दिन तक सल्लेखना की साधना की और सभी जीवों को संयम की प्रेरणा देते हुए आत्मचिंतन का संदेश दिया।
उन्होंने कहा कि आचार्य ने कठिन परिस्थितियों में भी मुनिचर्या का पालन कर संदेश दिया कि मन में दृढ़ संकल्प हो तो कोई भी कार्य असंभव नहीं है। कार्यक्रम के पूर्व आचार्य शांतिसागर का संगीतमय पूजन किया।
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