@आशीष बागड़ी
Political Analysis 29 अक्टूबर (दैनिक ब्यूरो नेटवर्क) प्रदेश में 7 सीटों पर होने जा रहे उपचुनावों में सबसे रोचक चुनाव सम्भवतः देवली-उनियारा विधानसभा क्षेत्र में होने जा रहा है, जहाँ एक ओर राजस्थान की भाजपा सरकार की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है।
वहीं दूसरी ओर कांग्रेस और दो बार जीते विधायक व पहली बार जीते सांसद हरीश चंद्र मीना की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है। ये देखना दिलचस्प रहेगा कि इस चुनाव में कोन बाजी मारेगा। लेकिन इतना तय है कि कांग्रेस व बीजेपी में इस बार सीट जीतने की रस्साकशी ज्यादा रहने वाली है। कांग्रेस के समक्ष सीट बरकरार रखने की कोशिश होगी। जबकि बीजेपी की कोशिश होगी कि दो बार चुनाव हारने के बाद इस सीट पर बीजेपी का कब्जा हो जाए। कांग्रेस के उम्मीदवार पूर्व विधायक व वर्तमान सांसद हरीश मीना क्रमश 21 हजार व 19 हजार मतों से विजय हुए। सबसे बड़ी चुनौती इस बड़े अंतर को पाटने की होगी। इस बार बीजेपी ने पूर्व विधायक राजेन्द्र गुर्जर को फिर मौका दिया है।

कांग्रेस स्थानीय प्रत्याशी के मुद्दे को भुनाने में जुटी
जबकि कांग्रेस ने स्थानीय उम्मीदवार केसी मीणा पर दांव खेला है। देवली-उनियारा विधानसभा क्षेत्र में काफी समय से स्थानीयता के मुद्दे पर लोगों की आवाज थी। लेकिन बाजी कांग्रेस ने मारी और स्थानीय उम्मीदवार केसी मीणा को टिकट देकर चुनाव को रोचक बना दिया है। कांग्रेस प्रत्याशी केसी मीणा उनियारा तहसील के रहने वाले है। ऐसे में ये मुकाबला भीषण होने वाला है, इसमें कोई संशय नही है। हालांकि बारा जिले के एक निर्दलीय उम्मीदवार नरेश मीणा के ताल ठोकने से बीजेपी की आशाएं बनी हुई है। लेकिन अभी मंगलवार तक का समय है। तब तक कुछ भी संभव है। यद्धपि चुनाव की तस्वीर मंगलवार शाम तक साफ होगी उसके बाद ये अनुमान लगाना सम्भव हो जाएगा कि उपचुनाव में मुकाबला सीधा होगा या बहुकोणीय होगा। निर्दलीय नरेश मीणा के खड़े रहने से बीजेपी को फायदा हो सकता है। लेकिन ये सब परिस्थितियों पर निर्भर करेगा। देवली-उनियारा में सरकार अपनी प्रतिष्ठा के लिए लड़ रही है। दो मंत्रियों के साथ करीब 7 विधायकों की लंबी फ़ौज उतार दी है, जो मंडल स्तर से लेकर पंचायत स्तर तक बीजेपी को जिताने की रणनीति पर काम कर रहे है। सरकार खुद बेहद गम्भीर है और इसी के चलते मुकाबला बेहद जटिल हो गया है।
जबकि कांग्रेस के पास परम्परागत वोटर्स के अतिरिक्त स्थानीय उम्मीदवार के मुद्दे पर बीजेपी का जवाब दे रही है। हालांकि दीपावली का त्यौहार नजदीक होने से फिलहाल माहौल में गर्माहट पैदा नही हुई है। लेकिन चर्चाओं ने जोर पकड़ना जरूर शुरू कर दिया है। धनतेरस, रूप चतुदर्शी, दीपावली, अन्नकूट, भाईदूज के पर्व होने से चुनावी माहौल 4 नवम्बर के बाद ही बनना संभव होगा। लेकिन 10 नवम्बर से 12 नवम्बर को देवउठनी एकादशी के ब्याह- सावों से फिर लोगों के वयस्त होने का समय भी है। लिहाजा चुनावी माहौल में एकरूपता नही बन पाएगी। उम्मीदवार विधानसभा क्षेत्र में पूरी तरह भ्रमण भी नही कर पाएंगे। तब तक 13 नवम्बर मतदान का दिन आ जाएगा।



