शिव आराधना के साथ होगी मां लक्ष्मी-कुबेर की पूजा
Deoli News 4 नवंबर (दैनिक ब्यूरो नेटवर्क) इस बार धनतेरस का पर्व शुक्रवार को होने से शुक्र प्रदोष व्रत का विशेष संयोग बन रहा है। इस दिन भगवान शिव की पूजा के साथ मां लक्ष्मी, भगवान गणेश और कुबेर की आराधना का भी विशेष महत्व रहेगा।
ऐसे में श्रद्धालुओं को धनतेरस पर शिव कृपा प्राप्त करने का विशेष अवसर मिलेगा। मनु ज्योतिष एवं वास्तु शोध संस्थान टोंक के निदेशक बाबूलाल शास्त्री ने बताया कि वैदिक पंचांग के अनुसार कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 6 नवंबर सुबह 10:30 बजे शुरू होकर 7 नवंबर को सुबह 10:47 बजे समाप्त होगी। प्रदोष काल में त्रयोदशी तिथि 6 नवंबर को होने से शुक्र प्रदोष व्रत इसी दिन रखा जाएगा। उन्होंने बताया कि 6 नवंबर को प्रदोष व्रत की पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 5:33 बजे से रात 8:09 बजे तक रहेगा। वहीं ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:52 से 5:44 बजे तक रहेगा। इस दिन हस्त नक्षत्र और कन्या राशि में चंद्रमा का संयोग भी रहेगा।
शास्त्री ने बताया कि धनतेरस और शुक्र प्रदोष का संयोग होने से इस दिन भगवान शिव के साथ मां लक्ष्मी, गणेशजी और कुबेर की पूजा-अर्चना करना विशेष फलदायी माना गया है।
प्रदोष व्रत का महत्व एवं पूजा विधि
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार प्रदोष काल में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने से सुख-शांति और समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है। इस दिन सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करने के बाद व्रत का संकल्प लें। शाम को प्रदोष काल में शिवलिंग पर जल, बेलपत्र और पुष्प अर्पित करें। धूप-दीप जलाकर शिव मंत्रों का जाप करें तथा व्रत कथा सुनकर आरती करें। श्रद्धापूर्वक पूजा करने से मनोकामनाओं की पूर्ति होने की मान्यता है।



