Deoli News 19 दिसंबर (दैनिक ब्यूरो नेटवर्क) शहर के अटल उद्यान के टीनसेड प्लेटफार्म पर चल रही संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन कथावाचक ने कहा कि कलयुग में भी भगवान दर्शन दे सकते हैं, बशर्ते भगवान के प्रति प्रहलाद भक्त जैसा विश्वास हो।
कथा के दौरान उन्होंने बताया कि शुकदेव जी कहते हैं आखिर समय में व्यक्ति जिसका चिंतन करता है, वैसी ही योनि में जन्म लेता है। भरतजी का दुसरा जन्म हिरण तथा तीसरे जन्म में पुनः मनुष्य बनना। भरतजी का भगवान की भक्ति में जड़वत होने पर जड़भरत नाम पड़ना। हिन्दू धर्म के अनुसार 36 प्रकार के नरक हैं। सात नरक पृथ्वी पर हैं, मृत्यु के बाद कर्मों के अनुसार नरक भोगता है। काम, क्रोध ओर लोभ रूपी नरक के तीन द्वार हैं। पं अजामिल द्वारा गणिका में आसक्ति करना, बुद्धि भ्रष्ट होने से अजामिल का पापकृत्य करना। संतों का गणिका वैश्या के घर जाना, संतों के कहने पर अजामिल द्वारा अपने छोटे पुत्र का नाम नारायण रखना आदि प्रसंग सुनाए।



