Deoli News 27 दिसंबर (दैनिक ब्यूरो नेटवर्क) संगीतमय श्रीराम कथा के दूसरे दिन शुक्रवार को पुष्प मुरारी बापू भगवान ने शिव और सती का प्रसंग सुनाया। उन्होंने कहा कि प्रभु परीक्षा से नहीं प्रतिष्ठा से प्राप्त होते हैं।
सती ने प्रभु श्रीराम की परीक्षा ली तो उनको वह मिलकर भी नहीं मिल पाए और शबरी ने भगवान राम की प्रतीक्षा की तो शबरी को भगवान मिल गए।भगवान की कभी परीक्षा नहीं लेनी चाहिए। भगवान बुद्धि का विषय नहीं है, भगवान भाव का विषय है। भाव का चित्रण करते हुए पुष्प मुरारी बापू ने कहा कि आज का इंसान का मन भव संसार में लगता है और बुद्धि भगवान में लगती है। जबकि भगवान बुद्धि से परे हैं, भाव भगवान के लिए अतिप्रिय है। भगवान कहते हैं कि भावना में भाव है तो भव से बेड़ा पार है, अर्थात भगवान भाव के भूखे हैं। भगवान कहते है भाव से मुझे भजे तो भक्त का बेड़ा पार निश्चित है। सती के त्याग के बाद भगवान शिव कैलाश पर समाधि में लीन हो गए। भजनों के बीच श्रद्धालुओं ने नृत्य किया। उल्लेखनीय है कि बावड़ी बालाजी मंदिर परिसर में दोपहर एक से शाम 4 बजे तक प्रतिदिन श्रीराम कथा आयोजित हो रही है।



