(इंडेप्थ स्टोरी)
कोचिंग इंस्टिट्यूट के विज्ञापन बोर्ड के पीछे देखने पर उड़ गए हो
Jahazpur News 18 अगस्त (आज़ाद नेब) जहाजपुर बाईपास पर शनिवार सुबह अपहरण करने की वारदात को अंजाम देने वाला साजिशकर्ता करीब 20 दिनों से घर के बाहर केमरा लगाकर रैंकी कर रहा था। जबकि पीड़ित परिवार को इसकी भनक तक नहीं लगी।
पीड़ित खुशराज मीणा बताया कि वारदात के बाद यह पता लगाया कि आखिर सुजीत सिंह सागर (अपहरणकर्ता) को उनकी गतिविधियों की कैसे जानकारी रही है। जबकि सुजीत ने पीड़ित को फोन करके कहा कि तूम जो भी घर पर कार्य करता है, उसे सारी जानकारी रहती है। इस बात को लेकर पीड़ित दिमाग लगाने लगा। वहीं पीड़ित की नजर घर के बाहर लगे बिजली के खंभे पर ट्रायोम इंस्टिट्यूट देवली के विज्ञापन के बोर्ड पर गई। संदेह होने पर पीड़ित ने उस बोर्ड को नीचे उतारा औऱ खोल कर देखा तो उसके अंदर कैमरा लगा था। उस बोर्ड में कैमरे के अलावा चार्जर, बैटरी, लाइट का बोर्ड भी था। इसके बाद पीड़ित ने इसकी सुचना जहाजपुर पुलिस को दी।
गांव में ऐसे लगा बोर्ड
देवली मे संचालित ट्रायोम इंस्टिट्यूट के डायरेक्टर राहुल राय ने बताया कि करीब एक महीने पहले 8233295077 फोन नंबर से कॉल आया औऱ कहा गया कि वे विज्ञापन के लिए बोर्ड बनाते है, तो इंस्टिट्यूट ने मना कर दिया। फिर फोनकर्ता ने कहा कि वे हर संस्था को एक सैम्पल के तौर पर फ्री में बनाकर दे रहे है। इस पर इंस्टिट्यूट ने हां कर दी। करीब 15 से 20 दिन पहले इसी नंबर से उसने बिजली के खंभे पर लगी फोटो भेजी ओर कहा कि देवली की ज्योति कॉलोनी में इसको लगाया है। जबकि यह बोर्ड लक्ष्मीपुरा गांव में लगाया गया था।
कैमरे के लिए लाइट की व्यवस्था की
लक्ष्मीपुरा निवासी चंबल परियोजना जालमपुरा चौराहे पर कार्यरत पंप ऑपरेटर अजयराज मीणा ने बताया कि करीब एक माह पहले वे ड्यूटी कर घर जा रहे थे। एक युवक ने बोरानी मे उन्हें रूकवाया ओर कहा कि कोचिंग सेंटर का बोर्ड है। जिसके प्रचार के लिए आपके गांव मे भी एक बोर्ड लगाना है। कंपनी ने नया वर्जन निकाला है। जिसमें लाइट की जरूरत होती है। आपके घर के पास लाइट का पोल है। उस पर लगा दे ओर लाइट आपके घर से दे देना। आपके लाइट का बिल आएं। तब बता देना तब कम्पनी से बिल पास करा देंगे।
ट्रायोम इंस्टिट्यूट के डायरेक्टर राहुल राय व लक्ष्मीपुरा निवासी चंबल परियोजना जालमपुरा चौराहे पर कार्यरत पंप ऑपरेटर अजयराज मीणा की मदद से साजिशकर्ता ने बिजली के खंभे पर कैमरा लगाया। जिससे उसे पीड़ित परिवार की हर गतिविधि की जानकारी मिलती रही।


