गुटबाजी से पायलट को मिल रहा फायदा!
@राजेन्द्र बागड़ी
Deoli News 11 नवम्बर (दैनिक ब्यूरो नेटवर्क) पचास हजार मतों से अधिक जीत का दावा करने वाले कांग्रेस के दिग्गज नेता सचिन पायलट को बीजेपी के स्थानीय व पूर्व विधायक अजीत मेहता ने असंतुष्ट लोगों के घरों पर चाय पीने पर मजबूर कर दिया। ये कोई सामान्य बात नही है। लेकिन दूसरी ओर बीजेपी में गुटबाजी के चलते अजीत मेहता को संगठन का उतना सहयोग नही मिल पा रहा है, जितनी अपेक्षा थी।

उल्लेखनीय है टोंक में संसदीय क्षेत्र के बड़े नेता समेत कई स्थानीय नेता मेहता के टिकट मिलने से चिढ़े हुए है। यहीं वजह है कि मेहता को अपना चुनाव प्रचार अपने ही समर्थकों के बूते पर चलाना पड़ रहा है। वर्ष 2018 में बीजेपी ने पहली बार डीडवाना से आए यूनुस खान को टिकट दिया था। जबकि कांग्रेस ने सचिन पायलट को मैदान में उतारा था। टोंक में चुनाव का जो ट्रेंड रहा है, उसके मुताबिक टोंक विधानसभा क्षेत्र में हिन्दू-मुस्लिम उम्मीदवार के बीच चुनाव होते रहे है। ये पहला मौका है।
जब कांग्रेस व बीजेपी दोनो दलों ने हिन्दू उम्मीदवार मैदान में उतारे है। टोंक में नामांकन के दौरान पायलट ने अपने तलाकशुदा होने की बात एफिडेविट में कबूली थी। पिछले चुनावों में पायलट को सारा पायलट के साथ होने के कारण पूरा फायदा मिला था। इस वजह से टोंक के मुस्लिम मतदाताओं ने फारुख अब्दुल्ला से रिश्तेदारी के कारण जमकर वोट किए। लेकिन अब ये माहौल कुछ बदल सकता है। बीते 5 साल तक सत्ता संघर्ष की लड़ाई के चलते पायलट टोंक में सीधा संपर्क नही रख पाए। नतीजा ये हुआ कि उन्हें लोगो के घरों पर जाकर मनाना पड़ रहा है।
बीजेपी के उम्मीदवार अजीत मेहता को टिकट मिलने से शहर के बड़े नेता महत्वाकांक्षा के चलते नाराज है और पार्टी के उम्मीदवार के साथ सहयोग नही कर रहे है। जबकि मेहता एक कांग्रेसी दिग्गज से लोहा ले रहे है। यदि जल्द बीजेपी के नेतृत्व ने संज्ञान नही लिया और आउट लाइन चल रहे बीजेपी के नेताओ को नसीहत नही दी तो बीजेपी की सीट पर भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। पायलट को जिस तरह से मशक्कत करनी पड़ रही है तो प्रतीत होता है कि टोंक में ” हवा” का रुख भले ही किधर हो लेकिन मेहता पायलट को कड़ी चुनौती पेश तो कर रहे है।



