Deoli News 15 दिसंबर (दैनिक ब्यूरो नेटवर्क) हनुमान नगर के कुंचलवाडा रोड स्थित आयोजन स्थल पर चल रही श्रीमद्भागवत कथा में शुक्रवार को कथावाचक पं महेन्द्र कुमार कौशिक ने राजा परीक्षित और शुकदेव मुनि संवाद, पाण्डव चरित्र, माता सती के चरित्र की कथा सुनाई।
उन्होंने कहा कि मनुष्य को सुख और दुःख में समानता का भाव देखकर परमात्मा का स्मरण करते रहना चाहिए। ऐसे भक्तों को ही ईश्वर मिलते है। सुख दुख कभी स्थाई नहीं होते। जबकि यह सब परिवर्तनशील है। उन्होंने पाण्डवो की माता कुंती व भगवान श्रीकृष्ण की भुआ से शिक्षा ग्रहण करने पर बल देते हुए कहा कि भगवान ने जब उनसे कुछ मांगने के लिए कहा तो माता कुंती ने दुःख मांगा, क्योंकि यदि मनुष्य के जीवन में दुःख हुआ तो वह ईश्वर को अवश्य याद करते हैं। जबकि सुखी मनुष्य ईश्वर को भूलकर माया मोह के जाल में फंस जाता है। उन्होंने सती के जन्म और विवाह की कथा सुनाई। वहीं राजा दक्ष के अभिमान के कारण माता सती को अपना शरीर त्यागना पड़ा। यहां श्रोताओं ने भजनों पर नृत्य भी किया।
शनिवार की भगवान कपिल मुनि का अवतार, उनके चरित्र का वर्णन, भक्त ध्रुव और जड़ भरत की कथा सुनाई जाएगी


