(नवरात्र स्पेशल)
Deoli News 12 अप्रैल (दैनिक ब्यूरो नेटवर्क) कहते हैं की मां के दरबार में कोई खाली नहीं जाता, यह मान्यता क्षेत्र के कुचलवाड़ा स्थित बीजासन माता मंदिर में लगवा रोगियों के लिए वरदान स्वरुप साबित हो रही है। यहां नवरात्र स्थापना के साथ शक्तिस्थलों पर श्रद्धालुओं की संख्या उमड़ने लगी है।
दरअसल देवली में स्थित बीजासन माता लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। यह शक्तिस्थल लकवा ग्रस्त रोगियों के लिए आशा की किरण है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि लकवाग्रस्त रोगियों को मां के दरबार में रोग से छुटकारा मिलता है और ऐसा देखा भी गया है। जहां कई रोगियों को लाभ हुआ है। यूं तो पूरे साल माता के दरबार में कई लकवाग्रस्त रोगी रहते हैं। लेकिन नवरात्र के दिनों में विशेष महत्व के कारण दूर-दूर से आए लकवा ग्रस्त रोगियों की भीड़ से पूरा परिसर आटा पड़ा होता है।
स्वयं प्रकट हुई बीजासन माता की चमत्कारिक प्रतिमा
माता के प्राकट्य को लेकर मंदिर के पुजारी ने बताया कि यह प्रतिमा करीब 400 साल पुरानी है। इस दौरान इसोदा नाम के कुम्हार जाति के एक व्यक्ति को मां ने सपने में दर्शन देकर अपनी प्रतिमा को जमीन से निकलने की प्रेरणा दी। इसके बाद इसोदा ने सपना के अनुसार उस स्थान पर पूजा अर्चना करने के बाद मां की प्रतिमा को बाहर निकाल और उसे कुचलवाड़ा गांव में स्थापित किया, जो आज बीजासन माता के नाम से पूजी जा रही। वैसे तो माता सभी के दुख दर्द को दूर करती है। लेकिन विशेष रूप से लकवा ग्रस्त रोगियों के लिए बिजासन माता माता वरदान साबित हुई है।
मिलता है रोगियों को फायदा
रोगियों को मंदिर में होने वाली सुबह, दोपहर, शाम और रात 12 बजे की आरती में ले जाया जाता है। इसके अलावा उन्हें माता के पंखे (झाड़ा) लगाकर भभूत खिलाई जाती है। जिसके बाद धीरे-धीरे रोगियों के लकवा ग्रस्त शरीर में फायदा होना शुरू हो जाता है। इसको लेकर आसपास के नहीं बल्कि दूसरे राज्यों से भी लगभग ग्रस्त रोगी यहां आते हैं। करीब 5 करोड़ की लागत से बन रहा है मां का भव्य मंदिर मंदिर समिति से जुड़े हुए गिरवर सिंह शक्तावत ने बताया कि बिजासन माता के मंदिर का नया निर्माण कार्य वर्ष 2008 से अब तक चल रहा है। मंदिर निर्माण के लिए जैसलमेरी पत्थर से हो रहा है। जिससे मंदिर बड़े ही भव्य तरीके से बनाया जा रहा हैं। उनका अनुमान है कि मंदिर की लागत में करीब 5 करोड रुपए की राशि खर्च होगी। अब तक मंदिर 95 फीसद5 तक पूरा हो चुका है। जिसमें साढ़े 4 करोड रुपए खर्च हो चुके हैं। यह सब निर्माण कार्य मंदिर में श्रद्धालुओं की आने वाली दान राशि के माध्यम से हुआ है।


