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आम चुनाव में क्या फिर लगेगी जातिवाद की आहुति या चलेगी मोदी लहर (टोंक-सवाईमाधोपुर)

@राजेन्द्र बागड़ी, वरिष्ठ पत्रकार

Political Report 17 मार्च ( दैनिक ब्यूरो नेटवर्क) टोंक-सवाईमाधोपुर लोकसभा क्षेत्र में 26 अप्रैल को मतदान होगा। नतीजे 4 जून को आएंगे। लोकसभा चुनावों का बिगुल बजने के साथ अब सभी राजनीतिक योद्धा कमर कसकर तैयार है। लेकिन एक सवाल अभी भी नेपथ्य में है कि क्या इस बार कोई लहर है या बीते विधानसभा चुनावों की तरह जातिवाद का प्रभाव देखने को मिलेगा। टोंक- सवाईमाधोपुर लोकसभा क्षेत्र हालांकि जनरल सीट है।

लेकिन बीते तीन चुनावों में दोनो ही दलों ने जातिवाद के आधार पर ही टिकट वितरित किए है। ऐसे में ये सहज सवाल हर मतदाता के जेहन में है कि इस बार भी शायद मीणा व गुर्जर उम्मीदवार ही मैदान में उतरेंगे। शनिवार को कांग्रेस प्रत्याशी हरीश चंद्र मीना के मैदान में उतरने के साथ ही वर्तमान सांसद सुखबीर जौनापुरिया पर जबरदस्त हमले से जाहिर हो गया है कि हरीश चंद्र मीणा, जौनापुरिया को घेरने की रणनीति बना चुके है। उन्होंने दो बार के बीजेपी सांसद रहे जौनापुरिया को आरोपो से एक्सपोज करने का प्रयास किया है। ये आरोप गम्भीर किस्म के है। यदि जौनापुरिया को बीजेपी टिकट देती है तो आमजनत में गलत मेसेज जाना निश्चित है।

हालांकि अभी टोंक से बीजेपी ने अपना प्रत्याशी घोषित नही किया है। लेकिन ये तय है कि दो बार जीते बीजेपी के जौनापुरिया के लिए ये चुनाव आसान भी  नही है। दो कार्यकाल की ऐसी कोई उपलब्धि भी नही है, जिसके आधार पर जौनापुरिया आम मतदाता के बीच जा सके। लोकसभा क्षेत्र की सबसे बड़ी इस कमजोरी को हरीश मीना ने अपना हथियार बनाया है। हो सकता है मीना अपने लिए बीजेपी से कोई दूसरा उम्मीदवार चाह रहे हो, लेकिन ये भी सही है कि यदि बीजेपी जौनापुरिया को तीसरी बार टिकट देती है तो ये चुनाव बहुत ही रोमांचक हो जाएगा। खैर 21 लाख मतदाताओं वाले इस लोकसभा क्षेत्र में गुर्जर और मीणा जाति की बहुलता से सारे समीकरण इन्ही दो जातियों के इर्द-गिर्द घूम रहे है। हरीश मीना वर्तमान में विधायक भी है और उनकी सारी शक्ति कांग्रेस के नेता सचिन पायलट है, जो गुर्जर जाति से आते है। पायलट का प्रभाव है और वे हरीश मीना को जिताने के लिए कोई कोर कसर नही छोड़ने वाले है। लिहाजा तय है पायलट लोकसभा क्षेत्र के गुर्जर मतदाताओं को कांग्रेस की और मोड़ने का प्रयास जरूर करेंगे। हालांकि बीजेपी ने पायलट के प्रभाव को तोड़ने के लिए विधानसभा चुनाव में गुर्जर आंदोलन के अगुवा नेता किरोड़ी बैसला के पुत्र विजय बैंसला को देवली-उनियारा क्षेत्र से उतारा। लेकिन हरीश मीना ने उन्हें धूल चटा दी।ऐसे में गुर्जरों के प्रभाव में बैंसला अपना आधिपत्य नही बना पाए। ऐसे में जाहिर है कि यदि बीजेपी ने फिर से इन्हीं को टिकट दिया तो सचिन पायलट लोकसभा क्षेत्र में गुर्जर मतदाताओं को कांग्रेस में मोड़ने का प्रयास करेंगे। बीजेपी के सामने फ़िलहाल ये गम्भीर चुनौती है।

राम मंदिर में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के बाद यद्यपि पूरे क्षेत्र में मोदी लहर का अहसास किया जा सकता है, ये मुद्दा भारी भी है। लेकिन इसमें सबसे बड़ा लोचा सिर्फ जातिवाद है। बैंसला परिवार के दो बार क्षेत्र में विफल रहने से अब बीजेपी अलग उम्मीदवार उतारती है तो ये चुनाव फिर से नई करवट बदल सकते है। लेकिन पुरानो पर दांव खेला तो बीजेपी के लिए दिक्कत बढ़ने वाली है। ये सीट जनरल है।

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लेकिन तीन लोकसभा चुनावों से बीजेपी गुर्जर को ओर कांग्रेस मीणा जाति के उम्मीदवारों को टिकट देती आई है। यदि बीजेपी इस मिथक को तोड़कर अन्य जाति के जाने- लपहचाने उम्मीदवार को टिकट देती है तो जातिगत धुर्वीकरण के चलते जनरल मतदाताओं में भी धुर्वीकरण संभव है, जिससे कांग्रेस के लिए मुसीबत बन सकती है।

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