Deoli News 4 सितंबर (दैनिक ब्यूरो नेटवर्क) पर्युषण पर्व के 8 वे दिन पर देवली की पार्श्वनाथ धर्मशाला में गुरुवार को मुनि प्रणीत सागर महाराज ने “उत्तम त्याग धर्म” पर प्रवचन दिया।
उन्होंने कहा, “शरीर में लग जाए आग, उससे पहले कर लो त्याग”। तत्त्वार्थ सूत्र के आठवें अध्याय की विस्तृत व्याख्या करते हुए मुनि ने मिथ्यादर्शन, अविरति, प्रमाद, कषाय और योग को कर्म बंध के कारण बताया। मीडिया प्रभारी विकास जैन ने बताया कि इस मौक़े पर, मुनि ने 64 ऋद्धिमन्त्र विधान में मंत्रो से तप की शक्ति बढ़ने और तप से त्याग की महत्ता बताई। प्रातःकालीन श्रुतशाला में विद्यार्थियों द्वारा तत्त्वार्थ सूत्र के 10 अध्याय का वाचन किया गया। रात्रि में समाज के बालकों द्वारा “विचित्र जैन वेशभूषा” का मंचन किया जाएगा।
इस अवसर पर प्रथम शांतिधारा का सौभाग्य माणकचन्द, दीपक कुमार (बाजटा परिवार) को प्राप्त हुआ, जबकि द्वितीय शांतिधारा का सौभाग्य सुशील जैन परिवार को प्राप्त हुआ। विधान पुण्यार्जन का सौभाग्य नेमीचंद जैन, धर्मचन्द जैन (साँडला) परिवार को प्राप्त हुआ।


