Deoli News 19 फरवरी (दैनिक ब्यूरो नेटवर्क) शहर के पटेल नगर स्थित शिवालय परिसर में चल रही सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा में बुधवार को पं कृष्ण बिहारी ने अजामिल कथा पर व्याख्यान दिया।
इसमें बताया कि जप नाम से अजामिल जैसे पापी भी भगवान के चरणों के अनुरागी बनते है। उन्होंने प्रहलाद चरित्र, समुद्र मंथन, वामन अवतार, मत्स्य अवतार और श्रीराम जन्म उत्सव के कथा प्रसंगो सुनाए। कथावाचक ने कहा कि जिन लोगों ने जिंदगी में दुखों की ठोकर खाई होती है। वह फिर दुखों से नहीं घबराते हैं। सुख और दुख तो जीवन की पहलू है, जो आते हैं और चले जाते हैं। रोटियां बनाने के भाव कई प्रकार के होते हैं। पहले मां की हाथ की रोटी। जिसमें ममता और वात्सल्य होता है। पेट भी भरता है पर मन नहीं भरता। दूसरी रोटी पत्नी की होती है जिसमें अपनापन और समर्पण भाव होता है। जिससे पेट और मन दोनों भर जाते हैं। तीसरी रोटी बहू के हाथों की होती है। जिसमें सिर्फ कर्तव्य का भाव होता है। आज के समय में सास और बहू को मां और बेटी की तरह रहना चाहिए।
परिवार में सभी को एक दूसरे की भावनाओं का सम्मान करना चाहिए, क्योंकि सभी एक दूसरे के पूरक होते हैं। बच्चों को मोबाइल में समय व्यतीत नहीं करने देना चाहिए ना ही खुद को मोबाइल के वसीभूत होना चाहिए।


