Deoli News 31 मार्च (दैनिक ब्यूरो नेटवर्क) बावड़ी बालाजी मंदिर परिसर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा आयोजन के पांचवे दिन कथावाचक बसंत महाराज ने कहा कि गोपी वह है, जिसका खाना-पीना, सोना- उठना-जगना सब कुछ श्री कृष्ण के लिए हो वही गोपी है।
“प्रेम को गोपन कर रखे वही गोपी” है। भक्त तो वह है, जो भगवान को अपने नेत्रों के माध्यम से अपने हृदय में समा लेता है। यह भक्त भगवत प्रेम की पराकाष्ठा है। भगवान गिरिराज को उठाने की सुंदर झांकी सजाई गई। उन्होंने कहा कि इंद्र को अपनी सत्ता और शक्ति पर घमंड हो गया था। उसका गर्व दूर करने के लिए भगवान ने बृज मंडल में इंद्र की पूजा बंद कर गोवर्धन की पूजा शुरू करा दी। इससे गुस्साए इंद्र ने बृज मंडल पर भारी बारिश की। वहीं जल प्रलय से लोगों को बचाने के लिए भगवान ने कनिष्ठा उंगली पर गोवर्धन पर्वत को उठा लिया। सात दिनों के बाद इंद्र को अपनी भूल का एहसास हुआ। उल्लेखनीय है कि उक्त कथा का आयोजन दुर्घटना में घायल गोवंश की सेवार्थ सहायता राशि एकत्रित करने के उद्देश्य से किया जा रहा है।
इस राशि का उपयोग सांवरिया सेठ गौ चिकित्सालय गणेश रोड स्थित गौशाला में घायल गोवंश के उपचार व गौशाला के विकास कार्यो के लिए किया जाएगा।


