दुनियाभर में हर साल 70 लाख लोग आत्महत्या करते हैं
(हेल्थ एक्सपर्ट व्यू)
Deoli News 11 अप्रैल (दैनिक ब्यूरो नेटवर्क) विश्व स्वास्थ्य संगठन संगठन के मुताबिक 15 से 19 साल के युवाओं के बीच मौत की चौथी सबसे बड़ी वजह आत्महत्या है। यही कारण है कि सरकार ने आत्महत्या करने की कोशिश को अपराध की श्रेणी से हटा दिया है। आईपीसी की धारा 309 कानून के तहत जान देने की कोशिश करने वाले को एक साल तक की जेल और जुर्माने की सजा होती थी। यह कहना है मनोचिकित्सक डॉ. शुभम झंवर का है। उन्होंने कहा की आर्थिक तंगी, कर्ज, बीमारी और पारिवारिक क्लेश आज आत्महत्या के अहम कारण बनते जा रहे हैं। जिनकी वजह से व्यक्ति डिप्रेशन में चला जाता है। इनमें आर्थिक तंगी व पारिवारिक क्लेश मुख्य है, जिन्हें व्यक्ति सहन नहीं कर पाता।
आत्महत्या के प्रमुख कारण
नशीले पदार्थों का सेवन करना, मनोविकार (अवसाद, बाइपोलर डिस्ऑर्डर), बच्चो से अत्याधिक आकांक्षाएं ओर अपेक्षाएं रखना और उसे पूरी करने के लिए दबाव बनाना, घातक साधनों तक पहुंच (जैसे, घर में हथियार या धारधार वस्तु रखना), नुकसान और अन्य घटनाएँ (उदाहरण के लिए, किसी रिश्ते का टूटना या मृत्यु, शैक्षणिक विफलताएँ, कानूनी मसले, वित्तीय कठिनाइयाँ, किसी के द्वारा तंग किया जाना), आघात या दुर्व्यवहार का इतिहास, पुराने दर्द सहित पुरानी शारीरिक बीमारी आत्महत्या के मुख्य कारण है।
आत्महत्या के संकेत, इन्हें पहचाने
अक्सर मौत, मरने या आत्महत्या के बारे में बात करना या लिखना, निराशाजनक, असहाय या बेकार होने के बारे में टिप्पणी करना, जीने का कोई कारण न होने की अभिव्यक्तियाँ, जीवन में उद्देश्य ना होने की भावना; “मैं यहाँ नहीं होता तो बेहतर होता” या “मैं इस सब से दूर जाना चाहता हूँ” जैसी बातें कहना है। इन संकेत को पहचाना चाहिए।
“कभी भी आ सकता है आत्महत्या का ख्याल
झंवर का कहना है कि आत्महत्या की बात केवल ध्यान खींचने करने के लिए की जा रही है, आत्महत्या की बात करने से दूसरे लोग प्रेरित हो सकते हैं, दूसरे लोग भी आत्महत्या करने के बारे में सोच सकते हैं, जो लोग पूरी तरह ठीक हैं वे आत्महत्या के बारे में नहीं सोच सकते।
चिकित्सा सहायता से फ़ायदा होता है
मनोचिकित्सक डॉ. शुभम झवर का कहना है कि आत्महत्या के विचार आने पर परिवार और मित्रों की सहायता से मनोचिकित्सक की सहायता लेना अनिवार्य हो जाता है। आप जितना जल्दी हो सकें, उस व्यक्ति को मनोचिकित्सक के पास ले जाए। इस समय एंटीडिप्रेस्सेंट और एंटी एंग्जायटी दवाये काफी कारगर साबित होती है। जिन्हे मनोचिकित्सक के परामर्श पर ही लेना चाहिए। इस दौरान गंभीर मरीजों के लिए “इलेक्ट्रोकनवल्सिव (ईसीटी) थेरेपी काफ़ी कारगर होती है। इसे आम तौर पर शॉक थेरेपी भी कहते हैं। लेकिन इसमें कोई इलेक्ट्रिक शॉक नहीं दिया जाता और सुधार भी तेज़ी से होता है.”

उल्लेखनीय है कि पिछले दिनों देवली क्षेत्र में आत्महत्या के मामले काफी बढ़े हैं। खासकर क्षेत्र की बनास नदी नेगड़ियां पुलिया, सावर स्थित नापाकाखेड़ा पुलिया सुसाइड पॉइंट बनी है। जहां डिप्रेशन व अवसाद से ग्रसित दर्जनों लोगों ने आकर आत्महत्या की है। इनमें सभी उम्र के देखे गए हैं। वही हाल ही में पारिवारिक क्लेश से तंग आकर शहर के अंसारी कॉलोनी निवासी एक व्यक्ति ने भी अपने जीवन लेना समाप्त कर ली। ऐसे में जीवन में किसी भी समस्या का समाधान है और यदि कोई व्यक्ति आत्महत्या की ओर बढ़ता है तो उसे उपचार लेने की जरूरत है, ताकि समय रहते उसे डिप्रेशन से उबारकर इस कदम उठाने से रोका जा सके।


