Deoli News 6 अप्रैल (दैनिक ब्यूरो नेटवर्क) संसार से मुक्ति चक्र में मोह सबसे बड़ी बाधा है। जिसके भी मोह रूपी चश्मा चढ़ जाता है वह भ्रम व अज्ञान के नजरिए से देखता है।।उसका दुखी एवं चिंता में रहना ही मोह का कारण है। जिसकी आत्मा से मोह छूट जाता है।
वह जीव अनंत सुखी हो जाता है। सच्चा सुख तो सिर्फ आत्मा में है, आत्म ध्यान से ही परमात्मा को पाया जा सकता है। यह प्रवचन आर्यिका स्वस्ति भूषण माताजी ने जैन कॉलोनी पंचकल्याण के दौरान धर्म सभा में कही। उन्होंने कहा कि सुख का खजाना प्राणी खुद होता है। लिहाजा सबसे पहले अपनी आत्मा की चिंता करना चाहिए। मुनिसुप्रभ सागर महाराज ने कहा कि सुख का मार्ग, मोह को छोड़ने पर मिलेगा। यदि कर्म खराब है तो कुंडली काम की नहीं होती। उन्होंने कहा परम लक्ष्य को प्राप्त करना है तो मोह को छोड़कर वैराग्य धारण करना पड़ेगा।
इस दौरान मुनि वैराग्य सागर महाराज ने भी आत्म कल्याण के लिए पुरुषार्थ करने का संदेश दिया। इससे पूर्व प्रतिष्ठाचार्य के सानिध्य में प्रातः जाप्यानुष्ठान, आराधना, मंगलाष्टक, अभिषेक,नित्यपूजन की गई। बाद में मोक्ष कल्याणक में सम्मेदशिखर पर ध्यानमुद्रा में विराजित पार्श्वनाथ भगवान मोक्ष प्राप्त की क्रिया साकार हुई। इस दृश्य को देख पांडाल जयकारों से गूंज उठा। वही मोक्ष कल्याणक पूजन, मंदिर की नवीन वेदी में प्रतिमा स्थापना, शिखर पर कलश व ध्वजा स्थापना की गई।
पंचकल्याणक के पदाधिकारियों व व्यवस्थापकों का सम्मान किया गया। इससे पहले शनिवार रात महिला संगीत व जैन कवि सम्मेलन का भी आयोजन हुआ।


