Deoli News 4 जून (दैनिक ब्यूरो नेटवर्क) पुरुषोत्तम मास में देवली के अटल उद्यान टीनशेड परिसर में आयोजित 15 दिवसीय संगीतमय श्रीराम कथा ज्ञानयज्ञ महामहोत्सव में बुधवार रात महामंडलेश्वर दिव्य मुरारी बापू ने शिव चरित्र और भक्ति के महत्व पर प्रकाश डाला।
बापू ने कहा कि रामायण में वर्णित शिव चरित्र हमें जीवन जीने की कला सिखाता है, जो सुख का मूल आधार है। उन्होंने महाभारत के उदाहरण से स्पष्ट किया कि युधिष्ठिर की तरह शत्रु के प्रति भी अजातशत्रु का भाव रखना ही श्रेष्ठ जीवन है। बापू के अनुसार संतों की सेवा के बिना ईश्वर की पूजा अधूरी है, क्योंकि संत के हृदय में स्वयं प्रभु वास करते हैं। उन्होंने भक्ति को एक ‘चिंतामणि’ बताया जो जीवन से मोह, अज्ञान और काम-क्रोध रूपी अंधकार को मिटा देती है। भक्ति के प्रभाव से विष भी अमृत बन जाता है और भक्त का जीवन अभय हो जाता है।
जब मनुष्य यह समझ लेता है कि सबके भीतर प्रभु का वास है, तब भेद समाप्त हो जाता है और जीवन कृत-कृत्य हो जाता है। कथा के दौरान हुए कीर्तन ने भक्तों को भाव-विभोर कर दिया और कार्यक्रम का समापन आरती व प्रसाद वितरण के साथ हुआ। श्रद्धालुओं ने व्यास पीठ के करीब पहुंचकर संत का आशीर्वाद भी लिया।


