Saturday, June 6, 2026
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HomeDainik Bureau Deskअसंतुलित मन ही बीमारियों की मूल जड़ है: मुरारी बापू

असंतुलित मन ही बीमारियों की मूल जड़ है: मुरारी बापू


Deoli News 6 जून (दैनिक ब्यूरो नेटवर्क) पुरुषोत्तम मास में देवली के अटल उद्यान टीनशेड में आयोजित 15 दिवसीय संगीतमय श्रीराम कथा ज्ञानयज्ञ महामहोत्सव में शुक्रवार रात महामंडलेश्वर दिव्य मुरारी बापू ने श्रीराम कथा के प्रसंगों के साथ जीवन में मानसिक समता के महत्व पर प्रकाश डाला।

बापू ने कहा कि मानसिक और भावनात्मक असंतुलन ही शारीरिक व्याधियों का सबसे प्रमुख कारण है। उन्होंने कहा कि जिस व्यक्ति के जीवन में समता है, वही वास्तव में शरीर और मन से स्वस्थ है। समता का गुण मनुष्य को जीवन की हर विषम परिस्थिति से लड़ने का सामर्थ्य प्रदान करता है। वैज्ञानिक तथ्यों का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि आज के समय में हृदय रोग और कैंसर जैसी असाध्य बीमारियों का एक बड़ा कारण मनुष्य की बिगड़ती मानसिक स्थिति है। वर्तमान पीढ़ी में क्रोध, प्रतिस्पर्धा और असहिष्णुता का प्रभाव इतना अधिक हो गया है कि लोग छोटी-छोटी बातों को मन में गांठ की तरह बांध लेते हैं। यही दबी हुई नकारात्मकता आगे चलकर गंभीर बीमारियों को जन्म देती है।

इन व्याधियों से मुक्ति का उपाय बताते हुए उन्होंने मन को सरल और सहज बनाने का संदेश दिया। बापू ने कहा कि जीवन में क्षमा करने और क्षमा मांगने का गुण विकसित करना अनिवार्य है। मन से बातों की गांठे खोलकर ही पूर्ण स्वास्थ्य प्राप्त किया जा सकता है। कथा के दौरान उन्होंने श्री रामचरितमानस के संदर्भ में भगवान शंकर और माता पार्वती के संवादों का वर्णन किया।

इस अवसर पर श्रद्धालु महिलाएं कथा के दौरान भक्ति में सराबोर होकर नृत्य करती नजर आईं। समापन में आरती के साथ प्रसाद का वितरण किया गया।

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