पुलिस ने निष्पक्ष जांच का दिया आश्वासन
Deoli News 12 जून (दैनिक ब्यूरो नेटवर्क) हनुमान नगर थाना क्षेत्र में अधिवक्ता नरेंद्र कुमार मीणा के साथ हुई कथित मारपीट और दुर्व्यवहार का मामला आखिरकार कानून सम्मत कार्रवाई के बाद शांत हो गया है। पुलिस द्वारा मामले में जीरो नंबर की एफआईआर दर्ज किए जाने के बाद अधिवक्ताओं ने अपना दो दिवसीय धरना-प्रदर्शन समाप्त कर दिया है।
इस घटनाक्रम के बाद स्थानीय प्रशासन और अभिभाषक संघ के बीच सौहार्दपूर्ण वार्ता हुई।
“यह था पूरा मामला”
दरअसल विवाद की शुरुआत मंगलवार रात को हुई, जब अधिवक्ता नरेंद्र कुमार मीणा ने आरोप लगाया कि पुलिसकर्मियों ने उन्हें जबरन वाहन में बैठाया और रास्ते में उनके साथ मारपीट की। अधिवक्ता का आरोप है कि उन्हें थाने ले जाकर भी प्रताड़ित किया गया और थाना प्रभारी ने रिपोर्ट लेने से इनकार कर दिया।
इस घटना के बाद स्थानीय वकीलों ने इसे अधिवक्ता समुदाय के स्वाभिमान पर हमला बताते हुए आंदोलन का रुख अपना लिया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए भीलवाड़ा पुलिस अधीक्षक ने त्वरित कदम उठाते हुए प्रथम दृष्टया दोषी पाए गए हेड कांस्टेबल सुनील और कांस्टेबल दीपेंद्र को लाइन हाजिर कर दिया। इसके बावजूद वकीलों ने दोषियों की गिरफ्तारी और अन्य संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग को लेकर देवली थाने का घेराव कर दिया था। विरोध प्रदर्शन के दौरान अधिवक्ताओं ने स्पष्ट किया था कि जब तक कानूनी रूप से रिपोर्ट दर्ज नहीं की जाती, वे पीछे नहीं हटेंगे। शुक्रवार को लगातार दूसरे दिन भी वकीलों का धरना जारी रहा।
देवली पुलिस का तर्क था कि यह घटना हनुमान नगर इलाके में हुई तो वहीं की पुलिस को इस पर कार्रवाई करनी होगी। लेकिन अधिवक्ता देवली थाने का मामला करार देते हुए यहां रिपोर्ट दर्ज करने की मांग कर रहे थे। आखिर बातचीत के बाद पुलिस द्वारा जीरो नंबर की रिपोर्ट दर्ज कर मामले को उचित कार्रवाई के लिए हनुमान नगर थाने भेजने की प्रक्रिया पूरी की गई। इस कदम के बाद अधिवक्ताओं ने अपना आंदोलन वापस ले लिया। प्रदर्शन की समाप्ति के बाद अधिकारियों और अधिवक्ताओं के बीच हुई सौहार्दपूर्ण बैठक में भविष्य में बेहतर तालमेल बनाने पर चर्चा हुई।
बैठक में एडिशनल एसपी पुष्पेंद्र सिंह, डीएसपी हेमराज, थाना प्रभारी दौलत राम गुर्जर, जहाजपुर डीएसपी समेत अधिकारी मौजूद थे। इसी तरह अभिभाषक संघ अध्यक्ष ललित चौहान, अधिवक्ता संदीप काटिया, राजेश जैन, महावीर सिंह, बाबूलाल मीणा समेत ने अधिकारियों से बातचीत की। अधिवक्ताओं ने पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई पर संतोष जताते हुए संबंधित अधिकारियों का आभार व्यक्त किया। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच की जा रही है और जो भी दोषी पाए जाएंगे, उनके खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई की जाएगी।
उक्त रिपोर्ट में परिवादी अधिवक्ता ने पुलिसकर्मियों पर मारपीट करने मोबाइल छीनने और मारपीट के दौरान आई चोटों का मेडिकल नहीं कराने का भी आरोप लगाया है। समझौता वार्ता के दौरान जहाजपुर डीएसपी रेवडमल मौर्य ने भरोसा दिलाया कि मामले की जांच सर्कल के किसी अन्य जांच अधिकारी से कराई जाएगी।


