मुनि सुप्रभ सागर ने बताया आत्मकल्याण और आध्यात्मिक चेतना का महत्व
Deoli News 19 अगस्त (दैनिक ब्यूरो नेटवर्क) श्रीमहावीर दिगंबर जैन धर्मशाला ट्रस्ट में विद्या वैराग्यवर्धन वर्षायोग 2026 के अंतर्गत मुनि वैराग्य सागर महाराज एवं मुनि सुप्रभ सागर महाराज के सानिध्य में 23वें तीर्थंकर भगवान पारसनाथ का मोक्ष कल्याणक दिवस धूमधाम से मनाया गया।
कार्यक्रम की शुरुआत भगवान के प्रथम अभिषेक एवं शांतिधारा से हुई, जो संजय कुमार एवं अक्षत कुमार काला ने की। इसके बाद भगवान के मोक्ष कल्याणक पर 23 किलो का लड्डू चढ़ाया गया, जिसका पुण्यार्जन अनिल कुमार बाकलीवाल ने प्राप्त किया। अन्य श्रद्धालुओं ने भी मोक्ष कल्याणक के अवसर पर लड्डू चढ़ाए। मुनि सुप्रभ सागर महाराज ने कहा कि भगवान पार्श्वनाथ ने सम्मेद शिखरजी, वर्तमान में झारखंड में स्थित, पर कठोर तपस्या पूरी कर भाद्रपद शुक्ल सप्तमी के दिन सभी कर्मों का क्षय कर मोक्ष प्राप्त किया था। जैन दर्शन में मोक्ष को जीवन का सर्वोच्च लक्ष्य माना गया है।
जहां आत्मा जन्म-मरण के चक्र से मुक्त होकर अनंत सुख प्राप्त करती है। यह दिवस श्रद्धालुओं के लिए आत्मकल्याण एवं आध्यात्मिक चेतना जागृत करने का अवसर है। देवली में सम्मेद शिखर की रचना भी की गई है। मुनि सुप्रभ सागर महाराज ने कहा कि श्रद्धालु इसकी प्रतिकृति के समक्ष उपस्थित होकर इसे सम्मेद शिखर का स्वर्ण भद्र कूट मानकर आध्यात्मिक भावना के साथ दर्शन करें। इस अवसर पर सकल दिगंबर जैन समाज के श्रद्धालु उपस्थित रहे।



